रूपकुंड: रहस्यमयी झील में नर कंकालो के राज से उठा पर्दा, चौंका देगा खुलासा

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देश की सबसे रहस्यमयी झील कही जाने वाली रूपकुंड झील में सैकड़ों सालों से नर कंकाल पड़े हैं. कई सालों से वैज्ञानिक इनके यहां होने की वजह के बारे में पता करने में जुटे हुए थे. और अब शायद उन्हें इसमें कामयाबी मिल गई है.

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यहां पड़े नरकंकालों के डीएनए की जांच से कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. बता दें कि यह झील उत्तराखंड के चमोली जिले में पड़ती है.

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समुद्र तल से 16 हजार 499 फीट ऊंचाई पर स्थित रूप कुंड में कई नर कंकाल पड़े हैं. लोगों के मन में हमेशा ये सवाल रहता था कि आख‍िर ये नरकंकाल यहां कहां से आए. इसका कुछ हद तक जवाब वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है.

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बीरबल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलियो साइंसेस के वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय ने एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया में आयोजित कार्यशाला में इस बारे में कुछ अहम खुलासे किए.

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उन्होंने बताया कि ये नर कंकाल ग्रीक देश के लोगों के हैं. उनके मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ ग्रीक लोग यहां घूमने आए होंगे और वे यहीं मरकर खत्म हो गए. उनके मुताबिक ये कंकाल 850 ईसवी के हैं.

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अब तक यह माना जाता रहा था कि ये नरकंकाल सिकंदर की सेना की टुकड़ी के होंगे. हालांकि इस राज के सामने आने के बाद यह तो साफ हो गया है कि ये नरकंकाल सिकंदर की सेना के नहीं हैं. क्योंकि सिकंदर 1000वीं ईसवी में भारत आया था.

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रूपकुंड को लेकर प्रचलित है कि मां पार्वती ने इस कुंड में अपना रूप देखा था. इससे वह काफी प्रसन्न हुई थीं. इसको देखते हुए भगवान श‍िव ने इस कुंड को रूपकुंड नाम दे द‍िया. यही वजह है कि हर राज जात में नंदा देवी यहां विश्राम करती हैं और उनके भक्त यहां पूर्जा-तर्पण देते हैं.

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जब आप रूपकुंड जाएंगे, तो आप समझ जाएंगे कि क्यों इस कुंड का नाम रूपकुंड रखा गया है. स्वर्ग सी खूबसूरती वाले इस कुंड तक आने-जाने का सिलसिला लगा रहता है. हालांकि अगर आप जाएं, तो यह ध्यान जरूर रख‍िएगा कि आप वहां कूड़ा न छोड़कर आएं. कम से कम हिमालय को तो हम इस मानवीय प्रकोप से छुटकारा दें.

 

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