काफल पाको… मिन नी चाखो

एक गांव में एक आदमी काफल बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. उसकी रोजी-रोटी का यही एक जरिया था. जिस दिन उसे काफल नहीं मिलते, पूरे परिवार को उस दिन भूखा सोना पड़ता.

एक दिन वह आदमी सुबह-सुबह जंगल काफल टीपने पहुंच गया. उसने काफी ताजे और रसीले काफल जमा कर लिए थे. उसने सोचा अभी एक टोकरी भर दी है. इसे घर ले जाता हूं और फिर शाम को आकर दूसरी टोकरी भर ले जाऊंगा.

वह आदमी घर आया. घर पर उसका बेटा था, जो अभी बहुत छोटा था. पिता ने अपने बेटे से कहा, ”बेटा मैं फिर जंगल जा रहा हूं काफल बीनने. तू इस टोकरी का ख्याला रखना. और इन्हें न तू खाना और ना ही किसी और को खाने देना. ठीक है.”

छोटे से बच्चे ने इस पर अपने पिता से मासूम‍ियत भरा सवाल किया. उसने पूछा, ”क्यों बौज्यू. काफल तो खाने की चीज है. इसलिए तो आप इन्हें लाए हैं. फिर हम क्यों नहीं इन्हें खा सकते?”

बेटे के मुहं में पानी देखकर उस आदमी ने समझाया, ”बेटा, ये तो अमीरों के खाने की चीज है. हम तो गरीब हैं और हम तो दाल-भात ही खाते हैं. इन्हें बेचेंगे, तो ही खा पाएंगे.”

बेटे को समझाकर आदमी जंगल काफल बीनने चला गया. इस दौरान घर पर बेटा काफल की टोकरी की हिफाजत करता रहा. कई बार उसका मन ललचाया कि वह एकाध काफल उठाकर खा ले. लेक‍िन पिता के डर से उसने हाथ भी नहीं लगाया.

सुबह का गया पिता शाम को लौटा. वह आदमी जैसे ही घर लौटा उसकी पहली नजर काफल की उस टोकरी पर पड़ी. टोकरी को देखते ही वह आगबबूला हो गया. टोकरी में काफल बहुत ही कम दिख रहे थे. उसे लगा कि उसके बेटे ने काफल खा लिए.

इस पर वह अपने बेटे पर तिलमिलाया. वह उसे मारने लगा, लेक‍िन बेटा अपने सच पर अड़ा ही रहा और वह कहता ही रहा, ”काफल पाको…मिन नी चाखो.” लेक‍िन पिता को उसकी बात पर विश्वास नहीं आया.

पिता ने गुस्से में बेटे को इतना मारा कि वह मर गया. गुस्से में लाल हुए पिता को इसका थोड़ा भी अफसोस नहीं हुआ. उसका गुस्सैल हृदय बेटे की मृत्यु से भी नहीं पिघला था.

रातभर बेटे की देह घर के आंगन में पड़ी रही और वो काफल भी. सुबह हुई. हमेशा की तरह उस आदमी ने काफल की टोकरी को देखा. टोकरी को देखते ही उसके होश उड़ गए.

टोकरी में तो काफल पूरे थे. जितना वह सुबह लाया था. दरअसल चटक धूप की वजह से काफल सूख गए थे. रात की चांदनी ने उन्हें नया जीवनदान दिया, जिससे वे फिर से रसीले हो गए.

आदमी को अपनी भूल का अहसास हुआ. उसने अपने बेटे के शव की ओर देखा और उसे लगा.. जैसे उसका बेटा अभी भी कह रहा हो, ”बौज्यू, काफल पाको… मिन नी चाखो.”

अपनी गलती का अहसास होने पर उसने भी बेटे के वियोग में प्राण त्याग दिए. कहा जाता है कि कई बार जंगलों में काफल बीनने गए लोगों को उस बच्चे के वो शब्द सुनाई देते. जिसमें वह कहता, ”काफल पाको… मिन नी चाखो. (काफल पके लेक‍िन मैंने नहीं खाए.)

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