3 हजार गांव खाली-2.85 लाख घरों पर ताले, संवर रहा उत्तराखंड!

उत्तराखंड में 7,555 कुल ग्राम पंचायत हैं. कुल गांव 16793 हैं, लेक‍िन इनमेें से 3 हजार से भी ज्यादा गांव अब खाली हो चुके हैं. कुछ गांवों में सिर्फ बुजुर्ग ही बचे हुए हैं.

नवभारत टाइम्स की एक खबर के मुताबिक 2000 में उत्तराखंड के बनने से अब तक 32 लाख से भी ज्यादा लोगों ने उत्तराखंड से पलायन किया है.

उत्तराखंड की समस्या यहीं खत्म नहीं हो जाती है. पलायन की समस्या लगातार बढती जा रही है. राज्य में कृषि योग्य 70 हजार हेक्टेयर भूमि बंजर हो चुकी है. बंजर कृष‍ि भूमि का रकबा एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा है.

नहीं रहे युवा वोटर
कुमाऊं के चंपावत जिले के 37 गांवों में कोई युवा वोटर नहीं रह गया है. यहां अब सिर्फ बुजुर्ग रहते हैं, वो भी गिने-चुने. 17 साल में उत्तराखंड की सरकार जरूर बदलती रही है, लेक‍िन यहां की स्थ‍िति और परिस्थ‍िति नहीं.

क्या है वजह
पहाड़ों से पलायन होने की सबसे बड़ी वजह यहां रोजगार की कमी है. इसके अलावा सभी गांवों तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से भी लोग शहरों का रुख कर रहे हैं. एनबीटी की खबर के मुताबिक अभी राज्य के 5 हजार से भी ज्यादा ऐसे गांव हैं, जिन तक सड़क नहीं पहुंची है.

स्वास्थ्य परेशानी सबसे अहम
आज उत्तराखंड के गांवों से जो बुजुर्ग भी पलायन करने लगे हैं, तो उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं. रात-बिरात कोई बीमार हो जाता है, तो उसे इलाज के लिए कई किलोमीटर का पैदल सफर तय कर शहर लाना पड़ता है.

गांवों में भी झोलाछाप डॉक्टरों की तादाद ज्यादा है. कई बार इनके गलत परामर्श से यहां के लोगों को इंफेक्शन जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ता है.

2.85 लाख घर पड़े हैं बंद
उत्तराखंड से पलायन करने वालों की संख्या 32 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है. इसके अलावा राज्य के 2.85 लाख घरों पर ताले लटके पड़े हैं. पलायन धीरे-धीरे उत्तराखंड को खोखला करता जा रहा है.

उत्तराखंड सरकार का कहां है ध्यान
9 नवंबर, 2000 को जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था, तो सभी को उम्मीद थी कि अब पलायन को रोकने के लिए काम किया जाएगा. पिछले 17 सालों में राज्य ने 8 मुख्यमंत्री देखे हैं. लेकिन इस दौरान मंत्र‍ियों के चाय-पानी के खर्चे के अलावा किसी भी बात पर चर्चा नहीं हुई है.

पलायन भले ही उत्तराखंड को खोखला कर रहा हो, लेकिन सरकार इस तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. फ‍िर चाहे व कांग्रेस की सरकार रही हो या फ‍िर मौजूदा भाजपा सरकार.

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