…जब श‍िव व‍िवाह में आए बाराती बन गए ‘सुक‍िल डांसी’

श‍िव का विवाह हिमालय राज की पुत्री नंदा से तय हुआ था. बारात की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. बारात का दिन आया और श‍िव नंदी में सवार होकर अपने मेहमानों के साथ बारात लेकर निकले. उनकी शादी में भूत-पिशाच, अगोरी, साधु-संत समेत अन्य कई लोग शामिल हुए.

कहते हैं जब बारात नंदा के यहां पहुंची, तो श‍िव का विकराल रूप देखकर नंदा की मां बेहोश हो गई. हालांक‍ि यह देखकर श‍िव ने अपना रूप बदला और वह एक सजीले-धजीले नौजवान बन गए.

खैर, फेरे हुए. नंदा की बारात कैलाश जाने के लिए निकली. इस दौरान रास्ते में श‍िव के साथ आए बाराती नृत्य करने में मशगूल थे. और तभी बारिश हुई. तेज बारिश होने के बावजूद भी मेहमान नाचने से पीछे नहीं हटे. जो बुजुर्ग थे, उन्होंने यहां-वहां आशरा ढूंढना शुरू किया.

तेज बारिश के बाद हिमपात भी होने लगा. बारात कैलाश पहुंचती, उससे पहले हिमपात काफी ज्यादा बढ़ गया. इसकी वजह से श‍िव की बारात में आए कई मेहमान बर्फ में ही दब गए.

चारों तरफ सिर्फ बर्फ ही बर्फ. ज्यादातर बाराती बर्फ की सफेद चादर में डूब गए और डूबने के बाद वह सफेद पत्थर बन गए. ये सफेद पत्थर आज भी कुमाऊं में मौजूद हैं.

कुमाऊं में इन पत्थरों को ‘सुकिल डांसी’ कहा जाता है. ये वही पत्थर हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में चकमक पत्थर कहा जाता है. श‍िव और नंदा की बारात की पहाड़ के लोकजीवन में एक नहीं, कई कथाएं प्रचलित हैं.

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