बॉलीवुड में धूम मचा रही उत्तराखंड की ये बेटी, दिल से आज भी उत्तराखंडी

गढ़वाली गीतों में अभ‍िनय कर अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने वाली भावना बड़थ्वाल आज बॉलीवुड में पहुंच चुकी हैं. ‘सावधान इंडिया’ सीरियल के कई एप‍िसोड का हिस्सा बनने के बाद वह अब आदित्य नारायण के साथ एक हिंदी गीत में नजर आ रही हैं. जी सिने स्टार की खोज में भी उन्होंने अपना लोहा मनवाया है. भावना भले ही बॉलीवुड में पहुंच चुकी हों, लेक‍िन दिल से आज भी वह पहाड़ी हैं.

छ‍िबड़ाट ने भावना जी से की एक खास मुलाकात. पढ़‍िए उनसे बातचीत के कुछ अंश:

अपने बचपन के बारे में कुछ बताइए?
मैं पौड़ी गढ़वाल से हूं. हालांकि मेरा जन्म जम्मू में हुआ है. मेरे पिता देशबंधु बड़थ्वाल सेना में सूबेदार मेजर की पोस्ट से रिटायर हुए हैं. मुझे बचपन से ही डांस और अभिनय का शौक था. मैंने जूडो और डांस में राष्ट्रीय स्तर पर भी हिस्सा लिया है. मेरी पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई है. मेरा पिता जी अब दून डिफेंस एकेडमी में ट्रेनिंग को-आर्ड‍िनेटर के तौर पर सेवा देते हैं. यह मेरे माता-पिता और भाई का ही सहयोग है कि आज मैं कामयाबी के इस मुकाम पर पहुंची हूं. उनसे मुझे हमेशा सहयोग मिला. उनके खुले विचारों ने मुझे आगे बढ़ने में मदद दी. इसके साथ ही मेरी कामयाबी का एक श्रेय उत्तराखंडी फिल्म इंडस्ट्री और यहां के रहिवाश‍ियों को भी जाता है, जिन्होंने हमेशा मेरे काम को सराहा है.

उत्तराखंडी एल्बमों में आपकी पारी किस एल्बम से और कब शुरू हुई?
उत्तराखंडी फिल्म इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत कांता प्रसाद जी के साथ एक एल्बम से हुई थी. हालांक‍ि किसी वजह से वह एल्बम रिलीज नहीं हो पाया. मेरा सबसे पहला गाना था ‘सकला.’ साहब सिंह रमोला जी के इस गीत को अ‍रविंद नेगी ने निर्देश‍ित किया था. इसके बाद पूरे 9 साल तक मैंने यहां काम किया. उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री ने मुझे बहुत कुछ द‍िया है.

आपका जन्म जम्मू का है, लेक‍िन आप अच्छी उत्तराखंडी बोल लेती हैं?
इसका पूरा श्रेय जाता है मेरे माता-पिता को. उन्होंने मुझे और मेरे भाई को कभी अपनी संस्कृति और बोली-भाषा से अलग नहीं रखा. आज भी मेरे माता-पिता घर में अपनी बोली-भाषा में बात करते हैं. यही वजह है कि हमें भी अपनी बोली-भाषा अच्छे से आती है. मैं हमेशा से उत्तराखंडी फिल्म इंडस्ट्री में काम करना चाहती थी और कुछ कोश‍िशों के बाद वह सपना भी पूरा हो गया.

आद‍ित्य नारायण के साथ आ रहे आपके गीत के बारे में कुछ बताइए?
आदित्य नारायण ने अपने पिता उदित नारायण के सदाबहार गीतों को एक नये अंदाज में गाया है. इसमें मैंने भी उनके साथ अभ‍िनय किया है. इस गाने में फीमेल वॉइस मोना भट्ट जी की है, जो खुद भी उत्तराखंड से हैं. इस गीत में काम करना मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात थी और इस टीम के साथ काम करने का काफी अच्छा अनुभव रहा.

आपका फेवरेट उत्तराखंडी गीत और आपको सबसे ज्यादा आनंद किस गीत के लिए अभ‍िनय कर आया?
मेरा फेवरेट गीत मीना राणा जी का ‘हम उत्तराखंडी छां’ है. नरेंद्र सिंह नेगी दा का ‘धरती हमरा गढ़वालै की…’ और ‘कौथ‍िगैरो’ गीत भी बहुत पसंद है. मैंने जिस गीत में भी अभ‍िनय किया है, वे सब मुझे काफी पसंद हैं और सब से मुझे कुछ न कुछ अनुभव मिला. ऐसे में एक गीत को चुनना मेरे लिए मुश्क‍िल है.

आप उत्तराखंड की चहेती बन चुकी हैं. हम आपको फुल फीचर बॉलीवुड फिल्म में कब देखने वाले हैं?
ये मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है कि मैं अपनों के बीच चहेती बन गई हूं. उत्तराखंड‍ियों के प्रेम के बूते ही मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं. और आपका प्यार ऐसे ही बना रहा, तो आप मुझे जल्द बड़े स्क्रीन पर भी देख पाएंगे.

आपने दूरदर्शन के साथ सीरियल किया. आपका दूसरा सीरियल कब आने वाला है?
डीडी के साथ सीरियल करने के बाद मैंने ‘सावधान इंडिया’ में काम क‍िया. हाल ही में मैंने एक महिला सशक्तिकरण पर बनी डॉक्युमेंट्री में काम किया है. इसमें मेरी मुख्य भूम‍िका है. डीडी के साथ दो शो और आने हैं. कुछ और भी प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी जानकारी आपको आगे मिलती रहेगी.

आप निर्माता भी बन चुकी हैं. अपनी इस पारी के बारे में कुछ बताइए?
जी हां. मैं नियंता पिक्चर्स से जुड़ी हुई हूं. नियंता पिक्चर्स मोशन पिक्चर और फोटोग्राफी व प्रोडक्शन से जुड़े हर काम को संभालती है. इसके अलावा हाल ही में मैंने एक प्रोडक्शन हाउस ‘पैराडाइज ऑफ मिनरवा-अ प्रोमिस लैंड’ भी शुरू किया है.

आप ने उत्तराखंडी और बॉलीवुड ही नहीं पंजाबी फिल्मों में भी काम किया है. इस बारे में कुछ बताइए?
जी हां. मैं हमेशा से एक बहुमुखी प्रतिभा वाली अभ‍िनेत्री बनना चाहती थी और आज भी मेरी यही कोश‍िश रहती है. मैं हर भाषा में काम करने को तैयार रहती हूं. ये मेरे लिए एक चुनौती होती है कि मैं खुद को अलग-अलग किरदार में ढाल सकूं और उसे बखूबी न‍िभा सकूं. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मैं अपने काम के साथ न्याय कर पाती हूं. एक कलाकार को कभी सीमित नहीं होना चाहिए.

आने वाले समय में आप किसी उत्तराखंडी एल्बम या फिल्म में नजर आने वाली हैं?
फिलहाल तो ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं है, लेकिन भव‍िष्य में अगर कोई अच्छा प्रोजेक्ट मिलता है, तो जरूर करूंगी. मैं कमबैक करना चाहती हूं, लेक‍िन किसी अच्छे प्रोजेक्ट से.

उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री को लेकर आप क्या कहेंगी?
उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री को सहयोग की जरूरत है. कई उम्दा कलाकार हैं, जिन्हें सही मंच नहीं मिल रहा. फिल्म इंडस्ट्री कुछ लोगों के हाथों में ही सीमित रह गई है. उत्तराखंड सरकार से उम्मीद करती हूं कि वह इंडस्ट्री पर ध्यान देगी और मार्गदर्शन करेगी. क्योंकि हमारे पास कला की कमी नहीं है, बल्क‍ि इसे पहचानने वालों की कमी है. एक अच्छी फिल्म नीति ही हमें प्रगति की ओर ले जा सकती है.

हमारे पाठकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
यही कहना चाहूंगी कि अपने क्षेत्र और संस्कृति को प्रोत्साहन दें. आने वाली पीढ़ी को हमारी संस्कृति से अवगत कराएं. अपनी बोली-भाषा हम सबको आनी चाहिए और इसे अपने पास ही न रखकर दूसरों को भी सीखाना चाहिए. हमारी पहचान ही हमारी संस्कृति है. इसलिए गर्व से कहें ‘हम उत्तराखंडी छां.”

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