सोते वक्त तेंदुवे ने किया हमला, तो बाप-बेटे ने ऐसे चखाया मजा

घनसाली. टिहरी गढ़वाल की घनसाली तहसील के बजिंगा गांव में तेंदुवे ने एक बाप-बेटे पर आधी रात को हमला किया. इस हमले में दोनों बाप-बेटे बुरी तरह से घायल हो गए हैं. दोनों को नई टिहरी स्थ‍ित बौराड़ी के अस्पताल में भर्ती किया गया है. रात के करीब 3 बजे तेंदुवे ने तब यह हमला किया, जब दोनों बाप-बेटे सो रहे थे. इस दौरान अगर बाप-बेटे ने अदम्य साहस न दिखाया होता, तो पूरा परिवार आज खत्म हो चुका होता.

ऐसे हुआ हादसा
उत्तराखंड में भेड़-बकरी पालने वाले दिनों-दिन और रातों-रात जंगलों का सफर तय करते हैं. इस दौरान वह कई बार जंगलों में ही बनी छानी(कच्चे मकानों) में ठहरते हैं. बज‍िंगा गांव के भरोसा राम मैठाणी और उनके पुत्र चैतराम मैठाणी के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी दो कमरों की छानी में ठहरे हुए थे.

रात को हुआ हमला
रात के करीब 3 बजे जब सब सोए हुए थे, तो तेंदुवे ने घात लगाकर हमला किया. उसने सबसे पहले उन कुत्तों को घायल किया, जो रखवाली के लिए वहां तैनात थे. इसके बाद वह दरवाजा तोड़कर छानी के भीतर घुसा. बकरियों पर हमला करने की कोश‍िश में आए तेंदुवे को भरोसाराम ने देख लिया. उन्होंने तेंदुवे को वहां से भगाने की कोश‍िश की, लेकिन वह उल्टा उन पर ही झपट पड़ा. उसने स‍बसे पहले उनके गले पर हमला बोला.

बाप को बचाने के लिए बेटा आया आगे
यह देखकर भरोसाराम जी के बेटे (जो उनके साथ ही सोया हुआ था) चैतराम ने तेंदुए को लात मारी और उसे खदेड़ने की कोश‍िश की. इतने पर तेंदुवा चैतराम पर झपट गया. तेंदुवे ने उसके हाथ पर हमला बोला. यह देखकर लहू-लुहान हुए बाप ने बेटे को बचाने की खातिर फिर तेंदुवे पर हमला बोला. इस दौरान तेंदुवे ने भरोसाराम जी के पेट, सिर और शरीर में कई जगहों पर हमले किए, लेक‍िन उन्होंने हार नहीं मानी.

तेंदुवे को आख‍ि‍र में ही हारना ही पड़ा
आख‍िरकार भरोसाराम जी और उनके बेटे चैतराम के साहस के आगे तेंदुवे की एक न चली और उसे दुम दबाकर भागना ही पड़ा. बाप-बेटे की इस जोड़ी ने न सिर्फ अपने अदम्य साहस से खुद की जान बचाई, बल्कि दूसरे कमरे में सो रहे परिवार के दूसरे सदस्यों व अपनी बकर‍ियों को भी सुरक्ष‍ित बचा लिया. इनके अदम्य साहस और हिम्मत को हमारा सलाम. इन्होंने साबित कर दिया कि इंसान की हिम्मत से मजबूत कोई भी खतरा नहीं हो सकता.

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