कुमाऊं: यहां दो महीने पहले ही शुरू हो जाती है होली

आज देशभर में होली का त्योहार मनाया जा रहा है. देश के कई राज्यों में होली मनाने का अलग-अलग अंदाज होता है. इसी में से एक अंदाज है, उत्तराखंड के कुमाऊं का.

यहां की होली एक दिन नहीं, बल्क‍ि काफी लंबी चलती है. इस दौरान कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. कुमाऊं में हौली को चीर बंधन के नाम से मनाया जाता है. इस दौरान यहां होली के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं.

क्यों कहा जाता है चीर बंधन
कुमाऊं में होली के 15 दिन पहले चीर बंधन किया जाता है. इस दौरान एक पैयां के पेड़ पर कुछ कपड़े पहनाए जाते हैं और से सजाया जाता है. अगले 15 दिनों तक इसकी रक्षा की जाती है, ताक‍ि दूसरे मुहल्ले वाले इसे चुरा कर न ले जाएं. जिस दिन पूरे देश में होली जलाई जाती है, उसी रात को यहां भी चीर जलाई जाती है.

इस दौरान यहां गाना-बजाना भी होता है. जिसमें जवान से लेकर बुजुर्ग तक सब शामिल होते हैं. होल्यारों की टोली अपने नाच और गायन से स‍बका मन हर्ष लेते हैं.

बैठकी होली:
उत्तराखंड के कुमाऊं में होली के त्योहार की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है. इस दिन राज्य के कई हिस्सों में ‘बैठकी होली’ का आयोजन किया जाता है. बैठ‍की होली में संगीत सभाओं का आयोजन होता है. इस दौरान पहाड़ी और भीम पलासी समेत अन्य रागों में गीत गाए जाते हैं. इस मौके पर कुमाऊंनी लोकसंगीत गाया जाता है.

खड़ी होली:
बैठकी होली के बाद नंबर आता है खड़ी होली का. इसमें उत्तराखंडी पारंपरिक वस्त्र पहनकर लोग गाते हैं और नृत्य करते हैं. इस दौरान ढोल और हुड़का की धुनों पर पारंपरिक नृत्य होता है. सामान्य और बहुत ही सिंपल यह नृत्य मन मोह लेता है.

महिला होली:
महिला होली का भी अपना रंग होता है. हालांकि इसमें पुरुषों के लिए जगह नहीं होती है. बैठकी होली की तरह ही इस होली में भी बैठकर संगीत सभा होती है. इसका आयोजन महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए किया जाता है. इसमें पारंपरिक गीत व संगीत सुने व गाए जाते हैं.

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