बॉलीवुड की चकाचौंध के बीच पहाड़ को लेकर चल रहा एक उत्तराखंडी हीरो

Bollywood actor Asish bisht

बॉलीवुड में उत्तराखंड के कई चेहरे अपनी धाक जमा रहे हैं. निर्देशक व गीतकार प्रसून जोशी हों चाहे हिमानी श‍िवपुरी या फिर भावना भड़थ्वाल और उर्वशी रौतेला. इसी लाइन में शामिल हो गए हैं एक और उत्तराखंडी हीरो आश‍िष बिष्ट.

आपने इन्हें टाटा डोकोमो, लेज और कोलगेट जैसी बड़ी कंपनियों के विज्ञापनों में देखा होगा, तब आपने इन पर ध्यान नहीं दिया होगा. अब आश‍िष अपने काम के बूते बॉलीवुड फिल्मों में लीड रोल करने लगे हैं. उन्होंने फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत रवीना टंडन के साथ की है. आश‍िष की पहली फिल्म ‘शब’ थी, जिसमें वह रवीना के टंडन के अपोजिट लीड रोल में थे.

Bollywood actor Asish bisht

बॉलीवुड में अपनी छाप छोड़ते उत्तराखंड के आश‍िश बिष्ट

छिबड़ाट ने आश‍िष बिष्ट से बॉलीवुड में उनके सफर पर और उत्तराखंड कनेक्शन को लेकर बात की. यहां पढ‍़‍िए उस बातचीत के कुछ अंश:

उत्तराखंड में कहां के रहने वाले हैं आप?
मेरा गांव उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में आता है. मेरे गांव का नाम-बिजवाण है. वैसे मेरा बचपन तो दिल्ली में गुजरा है. क्योंकि हर पहाड़ी परिवार की तरह ही मेरे पिता जी को भी नौकरी-चाकरी के लिए दिल्ली आना पड़ा था. हालांकि हम हमेशा अपने गांव आते-जाते रहते थे. मेरे दादा-दादी आज भी वहीं रहते हैं. हम उनसे मिलने जाते रहते हैं.

‘शब’ के बाद अगली किस फिल्म में हम आपको देखने वाले हैं?
शब के बाद मेरी दूसरी फिल्म ‘ड्राइविंग लेसन’ आ रही है. फेमस निर्देशक ऑनिर इसे निर्देश‍ित कर रहे हैं. इस फिल्म में मैं तनिष्ठा चटर्जी के साथ लीड रोल में नजर आऊंगा. इस फिल्म में मैं ड्राइविंग स‍िखाते हुए नजर आऊंगा.

आपको आपकी पहली फिल्म कैसे मिली?
मैं मुंबई में पिछले चार-पांच साल से रह रहा हूं. इस दौरान मैंने काफी सारे ब्रांड्स के लिए विज्ञापन में काम किया है. इन्हीं एड्स को देखकर मुझे ऑनिर ने ऑड‍िशन के लिए बुलाया. मैंने ऑड‍िशन दिया और मुझे ‘शब’ में लीड रोल के लिए चुन लिया गया. दरअसल इस दौरान उन्होंने मेरे चेहरे पर मासूमियत, जो कि हर पहाड़ी के चेहरे पर झलकती है, देखी. उन्हें फिल्म में एक उत्तराखंडी लड़का ही चाहिए था. इसलिए मेरे पास एक्ट‍िंग और पहाड़ी लुक, दोनों का कॉम्बिनेशन था, तो बात बन गई.

रवीना टंडन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
रवीना टंडन के साथ काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा. मैं काफी नर्वस था, क्योंकि पहली बार इतनी बड़ी एक्ट्रेस के साथ लीड रोल करने वाला था. लेकिन रवीना जी ने मुझसे बातचीत कर मेरी नर्वसनेस को खत्म कर दिया. उनके साथ काम करके काफी मजा आया.

रवीना के साथ लीड रोल से की अपने फ‍िल्मी करियर की शुरुआत

आपका बचपन दिल्ली में गुजरा है, तो क्या आप गढ़वाली बोल लेते हैं या नहीं?
हां. मैं गढ़वाली बोलता हूं. हालांकि अपनी भाषा में बात करने का उतना ज्यादा मौका नहीं मिलता है. मुझे अपनी भाषा आती है और इसमें बात करना काफी अच्छा लगता है.

आपका फेवरेट उत्तराखंडी गीत कौन सा है?
मुझे नरेंद्र सिंह नेगी जी का ‘तिन चिट्ठी किलै नी भेजी’ बहुत ज्यादा पसंद है. इसके अलावा मुझे हीरा सिंह राणा जी का नंदा देवी पर गाया हुआ एक गीत भी काफी ज्यादा पसंद है.

उत्तराखंड में अपने गांव जाने पर कैसा महसूस होता है आपका?
उत्तराखंड में काफी कुछ बदल गया है. जब हम छोटे थे, तो हमेशा गांव जाते थे. हरा-भरा माहौल होता था. आसपास लोग होते थे. बच्चे होते थे साथ में खेलने के लिए. लेकिन अब जाते हैं, तो साथ बैठने के लिए भी कोई नहीं मिलता. गांव अब खाली-खाली होने लगे हैं.

फिर भी क्यों आप उत्तराखंड जाना चाहते हैं?
आप दिल्ली-मुंबई में रहो या फिर दुनिया के किसी भी कोने में, लेक‍िन उत्तराखंड में सुकून मिलता है. मुंबई की भागदौड़ से जब द‍िल थक जाता है, तो उत्तराखंड की शां‍त वादियां, उसका बोझ उतारने में मदद करती हैं. दुनियाभर की सारी चिंता उत्तराखंड पहुंचकर खत्म हो जाती है. यहां पहुंचकर आपका सारा तनाव व दबाव खत्म हो जाता है.

कई विज्ञापनों में भी आ चुके हैं नजर

उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री के बारे में आप क्या सोचते हैं?
उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है. एक तरफ जहां सरकार को इस इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देना चाहिए. वहीं, कलाकारों और फिल्में व एलबम बनाने वालों को चाहिए कि वह पिक्चर क्वालिटी और बेहतर प्रोडक्शन पर ध्यान दें. सिर्फ कोई फिल्म बना देने से या फिर एलबम निकाल देने से इंडस्ट्री आगे नहीं बढ़ेगी. क्वांटिटी (संख्या) के साथ क्वालिटी पर भी ध्यान देना होगा.

उत्तराखंडी फिल्मों में काम करना चाहेंगे आप?
क्यों नहीं. जब मैंने अपने निर्देशक से पहली बार बात की थी, तो मैंने उनसे यही कहा था कि आप उत्तराखंड की सुंदरता ही नहीं, बल्क‍ि वहां के जागर जैसी परंपराओं को दिखाओ. जो परंपराएं सिर्फ यहीं हैं. क्योंकि ये तो सब जानते हैं कि उत्तराखंड काफी सुंदर है. लेक‍िन उस सुंदरता के साथ यहां की परंपराओं को दिखाना भी जरूरी है. कोई अच्छा प्रोजेक्ट मिलेगा, तो मैं काम जरूर करुंगा.

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