ए परदेश मां रौण वावा…

ए परदेश मां रौण वावा

सालों मां इक बार औण वावा

अफड़ी जागीर भै पाड़ै खातिर

नौन्याऊ तैं अफड़ा पाड़ी बणावा

तौं कुमों-गढ़वाई बणावा, तौं पाड़ी बणावा

 

छोटा बाआ दगड़ी अफड़ी भाषा नि लगोला

बोला त् कनक्वै फिर अफड़ी भाषा बचोला

हिंदी अंग्रेजी सी सीखी भी जाला

नी सीखण्या गढ़वाई जु तुम नी ब्वाला

गौं याद सारी भै संस्कार भरी

नौन्याऊ तैं अफड़ा पाड़ी बणावा
तौं कुमों-गढ़वाई बणावा, तौं पाड़ी बणावा

 

पंजाबी मराठी, जु भाषा चांदा वु तुम सिखा

गढ़वाई मात्रभाषा बस इथगा याद रखा

परदेश रैक तुम घरदेश न भुल्यां

ओण वाई पीढ़ी तैं बाटु दिखायां

रिवाज गढ़वाइ भै गीत लगाई

नौन्याउ तैं अफड़ा पाड़ी बणावा
तौं कुमों-गढ़वाई बणावा, तौं पाड़ी बणावा

बरषों सी राज-रज्वाड़ों की भाषा रै गढ़वाई

इतिहास अफड़ु तौन अफड़ी भाषा मा लिखाई

सरकार जु करु प्रयास

त् वै सकदु भाषा कु विकास

भाषा कु गर्भ करी भै मिली जूली सभी

पाड़ी बण्योला भै एक वै जोंला

नौन्याउ तैं अफड़ा गढ़वाई सिखोंला

तौं पाड़ी बणौला, कुमों-गढ़वाई बणौला

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