डांडी-कांठ्योंन भी धै लाणी छोड़याली…

उंद्यार बगण बैठिग्यां सभी
उकाअ नी कैका बसा की.
डांडी-कांठ्योंन भी धै लाणी छोड़याली,
क्वी बाच नी सुणदो अब यखा की.

पाड़ का जरम्यां परदेश का बणी गैन
बांझी ड्वखरी-मोरों पर तावा लैगेन.
अफड़ी औलाद औंदी सैलानी बणीक,
इखुली गुंडा-गूठ्यारुं की स्वैण कैन.

हिसाब कु लगालू पाड़ै की व्यथा की
डांडी-कांठयोंन भी धै लाणी छोड़याली,
क्वी बाच नी सुणदो यखा की.

डाम हमरी जिकुड़ी पर कै छन पैणा
पर यु त् बतावा ई कैक तैं छन बैणा
रोजगार हो या खेती आज भी नी यख,
नौंना हमरा परदेशो बाटु छन पकैणा.
जिम्मेदार कै बणौण पाडै़ की ईं दशा की
डांडी-कांठयोंन भी धै लाणी छोड़याली,
क्वी बाच नी सुणदो यखा की.

कादि उत्तराखंड कु विकास वालू
परदेश जायूं नौना घर बौड़ी आलू.
सुरोजगार मिललू जब अफड़ा मुलुक
केक क्वी उंदरी का बाटा जालू.

हरित प्रदेश बण सकदां छैं छी बसा की.
प्रयास जु हम सब मिलीक कौला भै-बंदो,
और सुणु जु सरकार यखा की

डांडी-कांठ्योंन भी धै लाणी छोड़याली,
क्वी बाच नी सुणदो अब यखा की.

                                                         -शायर दिलशाद

 

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