…बुलेट प्रूफ कंबल

यह किस्सा नीम करोली बाबा के भक्त रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) की किताब ‘मिरेकल ऑफ़ लव’ नाम से लिया गया है. इसमें ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ नाम से एक घटना का जिक्र है, जिसे हम आगे आपके लिए पेश कर रहे हैं.

बाबा का संक्ष‍िप्त परिचय:
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थ‍ित कैंचीधाम आश्रम की स्थापना नीम करोली बाबा ने की थी. बाब हनुमान के भक्त थे और यहां भी आपको हनुमान जी का मंदिर देखने को मिलेगा. उनके चमत्कार के किस्से पूरी दुनिया में फैले हुए हैं. उन्हीं में से है ये एक किस्सा- ‘बुलेटप्रूफ कंबल.’

कहानी:
1943 की वो रात और उत्तर प्रदेश का फतेहगढ़. नीम करोली बाबा अचानक यहां रह रहे अपने भक्त बुजुर्ग दंपति के यहां पहुंच गए. और कहने लगे कि आज रात यहीं रूकूंगा. बुजुर्ग दंपति को यह सुनकर बहुत खुशी हुई. उन्होंने बाबा को भोजन कराया और इसके बाद बाबा एक कंबल ओढ़कर चारपाई पर सो गए.

लेक‍िन सारी रात बुजुर्ग दंपति सो नहीं पाया. बाबा रातभर कराहते रहे, लेक‍िन उन्होंने एक बार भी कंबल नहीं हटाई. बुजुर्ग दंपति ये सब देख रहा था, लेक‍िन कुछ कर पाने में असमर्थ था. उन्हें महसूस हो रहा था कि जैसे कोई बाबा को मार रहा हो और वह दर्द में कराह उठ रहे थे.

खैर, बाबा ने कराहते हुए पूरी रात गुजारी. जैसे-तैसे सुबह हुई. सुबह बाबा चारपाई से उठे और उन्होंने चादर को लपेटकर बुजुर्ग दंपति को थमा दिया. उन्होंने कहा, ”इस कंबल को गंगा में बहा देना और इसे खोलकर मत देखना.” जाते-जाते बाबा ने कहा, ”चिंता मत करो, महीने भर में तुम्हारा बेटा लौट आएगा.”

जब दंपति चादर को लेकर गंगा की ओर जा रहा था, तो उन्हें महसूस हुआ कि चादर में कुछ लोहे का सामान है. हालांकि उन्हें यह आश्चर्यजनक लगा क्योंकि बाबा खाली चादर लपेटकर उनके सामने ही सोए थे. खैर उन्होंने बाबा की आज्ञा का पालन करते हुए चादर को पानी में विसर्जित कर दिया.

लगभग एक महीने बाद उनका पुत्र बर्मा में छिड़ी लड़ाई से लौट आया. वह ब्रिटिश फौज में सैनिक था. जब वह घर आया, तो उसने अपने माता-पिता को एक ऐसी कहानी सुनाई, जिससे वो समझ गए कि उस रात आख‍िर बाबा क्यों कराह रहे थे.

उसने बताया कि करीब महीने भर पहले एक दिन वह दुश्मन फौजों के बीच में घ‍िर गया था. रातभर गोलीबारी हुई. उसके सारे साथी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया. उसने कहा, ”मैं अभी तक यह नहीं समझ पाया हूं कि आख‍िर मैं कैसे बचा. उस गोलीबारी में उस पर एक भी गोली नहीं लगी. वह रातभर दुश्मनों के बीच जीवित रहा और जैसे ही सुबह हुई ब्रिट‍िश सेना उसे वहां से निकालकर ले गई.

यह वही रात थी, जिस रात नीम करोली बाबा उस बुजुर्ग दंपत्ति के घर रुके थे. और रात भर वह बुजुर्ग दंपति के बेटे पर लगने वाली गोलियों को अपने शरीर पर खा रहे थे.

नीम करोली बाबा के ऐसे ही अनेकों किस्से हैं, जिन्हें सुनकर आप रोमांचित हो जाते हैं. जीवन में सही मार्ग पर बढ़ने के लिए मार्गदर्शक की जरूरत होती है. सही मार्गदर्शक सही रास्ते का पता बताता है.

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