उत्तराखंड के खाली पड़े घरों में अब बुजुर्ग अकेले नहीं हैं…

पलायन की मार झेल रहे उत्तराखंड में दो ही चीजें ज्यादा नजर आती हैं. एक, खंडहर में तब्दील हो चुके मकान और दूसरे, इनमें रहने वाले बुजुर्ग.

लेक‍िन अब ये बुजुर्ग अकेले नहीं हैं. जिन्हें उनके बच्चे शहरों में नौकरी की खातिर छोड़ आए हैं. उन्हें अब सहारा मिल गया है. उनकी देखभाल का जिम्मा उठाने वाले आ गए हैं. और इसके लिए आप उत्तराखंड पुलिस का धन्यवाद कर सकते हैं.

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पौड़ी गढ़वाल पुलिस की अनोखी पहल

पौड़ी गढ़वाल पुलिस इंसानियत की मिसाल पेश कर रही है. यहां की पुलिस ने विशेष अभ‍ियान चलाया है. इस अभ‍ियान के तहत ये लोग बुजुर्गों की सेवा कर रहे हैं.

पुलिस अध‍िकारी बुजुर्गों के घर पहुंचकर उनकी खैर-खबर तो लेते ही हैं. इसके साथ ही उनकी हर समस्या का समाधान करने में भी जुटे हुए हैं.

अभियान के तहत लक्ष्मणझूला, श्रीनगर, कोटद्वार, धूमाकोट, पौड़ी और लैन्सडाऊन सहित सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस घर-घर जाकर बुजुर्गों की खुश-खबर ले रही है.uttarakhand police6

अपने इस अभ‍ियान में पुलिस बुजुर्गों की समस्याएं सुन रही है. उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए अलावा उनके खाने पीने की सारी जिम्मेदारी भी पुलिस ने अपने हाथ में ली है.

इस दौरान जो समस्याएं ऐसी हैं, जिनका निवारण अन्य विभागों से ही हो सकता है. ऐसी श‍िकायतों को संबंध‍ित विभाग से संपर्क साध कर निदान किया जा रहा है. पुलिस बुजुर्गों को राशन और उनकी जरूरत का सामान भी मुहैया कराती है.

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धन्यवाद उत्तराखंड पुलिस

बता दें कि उत्तराखंड में 900 से भी ज्यादा गांव खाली हो चुके हैं. पलायन आयोग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पलायन काफी ज्यादा बढ़ा है. जवान पलायन कर शहरों का रुख कर रहे हैं और बुजुर्ग अकेले ही खंडहरों में रहने का मजबूर हैं.

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