पौड़ी में भीषण सड़क हादसे से ये सबक न लिया, तो और भी जाने जाएंगी

विकास जोशी
उत्तराखंड के पौड़ी में रविवार को सड़क हादसा हुआ. इसमें अभी तक कहीं 47 तो कहीं 48 लोगों के मारे जाने की खबरें चल रही हैं. हादसे की क्या वजह रही, इसको लेकर अभी तक जांच ही चल रही है, लेक‍िन इस हादसे से एक बात जो निकल कर आ रही है. वो हम सबके कान खड़े करने के लिए काफी है. सिर्फ कान खड़े नहीं, बल्क‍ि इस हादसे से सबक लेकर अगर हमने आगे सुधार नहीं किया, तो ऐसे हादसे होते रहेंगे.

क्या ये थी वजह?
बताया जा रहा है कि जो बस दुर्घटनाग्रस्त हुई है. उसकी क्षमता सिर्फ 28 लोगों को लेकर जाने की थी. लेकिन बस में 58 लोग सवार थे. क्षमता से अध‍िक ले जाने की वजह से बस पहले ही बैठ जाती है. इससे बस पर ड्राइवर का नियंत्रण थोड़ा भी डगमगाया, तो हादसा होने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है.

ऐसा हुआ होगा?
इस सड़क हादसे के होने की एक ही वजह समझ में आती है. ड्राइवर बस चला रहा था. अचानक किसी चीज के सामने आने से या फिर सड़क पर बने गड्डे के चलते बस पर उसका संतुलन बिगड़ा. उसने बस को संभालने की कोश‍िश की, लेकिन वह इसमें नाकामयाब रहा. क्योंकि क्षमता से ज्यादा लोगों को चढ़ाने की वजह से बस पर भार काफी ज्यादा हो गया था. इसके अलावा लोगों का सामान भी बस में था. ज्यादा भार की वजह से ड्राइवर की बस को नियंत्रण करने की सारी कोश‍िशें धरी की धरी रह गईं. नतीजा यह हुआ कि भीषण हादसा हो गया.

हम क्यों नहीं लेते सबक?
यह पहली बार नहीं है, जब इतना भीषण हादसा हुआ हो. उत्तराखंड में इससे पहले 2004 में भी ऐसा ही एक भीषण हादसा हुआ था. इस दौरान टिहरी गढ़वाल के घुत्तू भिलंग से आ रही एक बस खाई में जा गिरी. इसमें भी काफी ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. इसे उत्तराखंड के इतिहास के सबसे बड़ी सड़क दुर्घटनाओं में गिना जाता है.

लेक‍िन इन सभी हादसों के बावजूद आज भी वाहन ओवरलोड होकर पहाड़ी रास्ते पर चलते हैं. युवाओं का छत पर बैठकर सफर करना यहां आम बात है. सरकार और पुलिस की लाख कोश‍िशों के बाद भी ये सब चीजें बंद नहीं होती हैं. और आख‍िर में हमें ऐसे हादसे देखने को मिलते हैं.

हमको सुधरना ही होगा
सड़क हादसों को रोकना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पहाड़ी रास्तों से सफर कर रहे लोगों को भी इस तरफ ध्यान देना होगा. उन्हें ऐसी बसों व गाड़‍ियों से सफर करने से बचना होगा, जो ओवरलोड हो. इसके अलावा सरकार को भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे और पहाड़ में बसों की संख्या बढ़ानी होगी.

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