टीचर को सस्पेंड करने वाले CM अपने घर की ये बात छुपाना भूल गए…

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्र‍िवेंद्र सिंह रावत जब भी जनता दरबार लगाते हैं, तो वे और उनका दरबार सुर्ख‍ियों में जरूर आता है. इस बार भी दरबार लगा, तो सुर्ख‍ियां बनीं. इस प्रकरण के बाद न सिर्फ मुख्यमंत्री की आलोचना शुरू हो गई, बल्क‍ि उनके घर का एक राज भी सामने आ गया है.

एक महिला टीचर, जिसका नाम उत्तरा पंत बहुगुणा है. वह अपनी मजबूरी गिनाती हुई मुख्यमंत्री दरबार में पहुंची और वह सीएम से खुद का तबादला उस जगह करने के लिए कहने लगी, जिस जगह उसके बच्चे रहते हैं.

उसने अपनी मजबूरी गिनाते हुए कहा कि उसके पति की मौत हो चुकी है. उसके बच्चों का उसके अलावा कोई सहारा नहीं है. वह नौकरी और बच्चों, दोनों को नहीं छोड़ सकती. इसलिए उसका तबादला किया जाए.

लेकिन मुख्यमंत्री जी ने इसका समाधान करने की बजाय उस श‍िक्ष‍िका को सभ्यता का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया. यही नहीं, सीएम इतने त‍िलमिलाए कि उन्होंने उस महिला टीचर को सस्पेंड करने का आदेश भी दे दिया. उनका गुस्सा यहीं नहीं रुका, उन्होंने उसे हिरासत में भी लिए जाने का आदेश दे दिया.

पिछले हफ्ते गुरुवार को इस प्रकरण के सामने आने के बाद शुक्रवार को एक खुलासा हुआ. आरटीआई के जरिए मांगी गई सूचना के जवाब में सामने आए एक पत्र ने सीएम की पत्नी को ही कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है.

आरटीआई के जवाब में मिले इस पत्र में शिक्षा विभाग ने अपना जवाब दि‍या है. इसमें बताया गया है कि सीएम रावत की पत्नी सुनीता रावत को देहरादून के अजायबपुर के प्राथमिक विद्यालय में 27 जून 1996 में तैनाती दी गई थी. इसके बाद 24 मई 2008 को उनका प्रमोशन भी किया गया, लेक‍िन फिर भी उनका तबादला नहीं हुआ. वह करीब 32 साल से एक ही जगह पर ढंटी हुई हैं.

बता दें कि जिस वक्त सुनीता रावत का प्रमोशन किया गया उस समय उत्तराखंड में बीजेपी के बीसी खंडूरी मुख्यमंत्री थे. इस आरटीआई के सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरन शुरू कर दिया है. बात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक पहुंच चुकी है.

उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में ऐसी सुगबुगाहट है कि त्र‍िवेंद्र सिंह रावत को इस पद से हटाया जा सकता है और उनकी जगह एक बार फिर निशंक को लाया जा सकता है. हालांकि अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं.

ले‍क‍िन जिस तरह मुख्यमंत्री ने एक महिला से अभद्र व्यवहार किया. वो भी उस दरबार में, जहां वह जनता की बात सुनने के लिए ही बैठे थे, वह कतई न्यायसंगत नहीं हो सकता.

Leave a Reply