घनसाली: युवक ने जो किया वो गलत था, पर भीड़ के किये को भी सही नहीं ठहरा सकते आप

टिहरी गढ़वाल जिले का घनसाली बाजार वैसे तो हमेशा गुलजार रहता है, लेक‍िन आज यह एक घटना की वजह से सुर्ख‍ियों में आ गया है. दरअसल सोमवार को कुछ लोगों ने एक समुदाय के युवक को एक गढ़वाली लड़की के साथ आपत्त‍िजनक हालत में पकड़ लिया. इसके बाद क्या था. लोग आग बबूला हो गए और पहले युवक की पिटाई की. फिर उसकी दुकान में भी तोड़फोड कर दी.

लोग यहीं नहीं रुके. उस लड़के को पीटने और उसे जूतों की माला पहनाकर घुमाने के बाद भीड़ ने संबंध‍ित समुदाय के लोगों की दुकानों में भी तोड़फोड़ की. जिनकी इस मामले में कोई गलती नहीं थी. बताया जा रहा है कि इससे काफी ज्यादा नुकसान हुआ है.

इसे लव जिहाद का मामला बताया जा रहा है. हालांकि यह अपराध का एक मामला है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लड़की नाबालिग है. ऐसे में युवक के ख‍िलाफ केस बनता है. क्योंकि उसने एक नाबालिग लड़की को बहलाया-फुसलाया और उसके साथ गलत काम करने की सोची.

लेक‍िन इसमें उन सब लोगों की क्या गलती है, जिनकी दुकानें तोड़ी गईं. वे लोग जो सालों से यहां अपनी दुकान चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं. अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं. इन लोगों की दुकान सिर्फ इसलिए तोड़ी गईं. क्योंकि ये लोग भी उस समुदाय के हैं, जिस समुदाय का वो लड़का है.

एक पल के लिए सोचें कि आख‍िर उत्तराखंड के लोग भी अब उन लोगों की तरह बनने लगे हैं, जो भीड़ तंत्र को सही मानते हैं. जिस युवक की गलती है. उसे भीड़ ने सजा दे दी. उसकी दुकान में भी तोड़फोड़ कर दी, लेकिन इसकी सजा उस लड़के के समुदाय के सभी लोगों को भी दे दी गई.

आख‍िर उनका क्या दोष था? लेक‍िन क्योंकि वे लोग उस व‍िशेष समुदाय के थे, जिस समुदाय का वो लड़का था. इसलिए भीड़ ने उनकी दुकानों में भी तोड़फोड़ कर दी. ऐसी ही अनेक घटनाएं हम आए दिन सुनते रहते हैं. जहां युवक-युवती के आपत्त‍िजनक हालात में मिलने की खबर होती है. लेक‍िन उन मामलो में भीड़ कम ही दुकानें जलाती है. क्योंकि लड़का भीड़ के ही समुदाय का है.

जब गलती करने वाला लड़का अथवा लड़की भीड़ के समुदाय की होती है, तो यह मामला अपराध का माना जाता है. इसमें कानूनी जो कार्रवाई होनी चाहिए, वही होती है. लेक‍िन क्योंकि इस मामले में शामिल लड़का एक विशेष समुदाय का था, इसलिए भीड़ ने खुद ही न्याय करने की ठान ली.

वर्तमान समय में हमारे देश में भीड़ तंत्र काफी ज्यादा हावी हो गया है. विशेष समुदाय के प्रति नफरत फैलाने में हम पीछे नहीं रहते. इस घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लगातार इन्हें शेयर किया जा रहा है और जहर बोया जा रहा है.

घनसाली में जो हुआ गलत हुआ. लड़के को उसके किये की सजा मिलनी चाहिए और कानून खुद देगा. लेक‍िन इस तरह भीड़ तंत्र का सहारा लेकर एक विशेष समुदाय पर हमला करना उत्तराखंड को शोभा नहीं देता है.

देवभूमि ने सबको अपनाया है और हमें ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि उत्तराखंड अतिथि‍ सत्कार के लिए जाना जाता है, न कि मारपीट के लिए और नफरत के लिए.

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