Monthly Archives: August 2018

न आसमां अपना रहा, न ये जमीन ही हुई, देवभूम‍ि में इंसानों की अब जगह कहां?

बूढ़ाकेदार में बादल फटने से एक ही पर‍िवार के 7 लोग मौत की नींद सो गए. ये कहानी सिर्फ बूढ़ाकेदार की नहीं है. चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी समेत लगभग उत्तराखंड के हर भाग की है. न्यूज चैनलों के लिए ये अब आम खबर हो चली है.

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बूढ़ाकेदार: बादल फटा और मलबे में दफ्न हो गए एक ही परिवार के 7 लोग

टिहरी गढ़वाल जिले के बूढ़ा केदार में एक हृदयविदारक हादसा हुआ है. बुधवार तड़के सुबह बादल फटने से आए मलबे में यहां एक ही परिवार के 8 लोग मलबे में दब गए.

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उत्तराखंडी लोक कथा: कलुआ कूबचनी

कलुआ कुबचनी. जिसकी जबान के चलते उसे कभी इज्जत नहीं मिली, लेकिन इसी जबान के चलते वह कभी भूखा भी नहीं मरा…

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लोक कथा: बूसे की रोटी खाएगा… झाड़ू की मार सहेगा… हां दीदी हां

हम फिर हाजिर हैं एक उत्तराखंडी लोक कथा लेकर. इस कथा में भाई-बहन के प्यार के अनूठी मिसाल पेश है.

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अगर कभी टिहरी डाम टूटा, तो आप सोच भी नहीं सकते इतना विनाश होगा!

अगर कभी टिहरी डाम टूटता है. किसी भी वजह से. तो इससे होने वाली हान‍ि की आप कल्पना भी नहीं कर सकते.

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मैं सोचता था सिर्फ शहर ही असुरक्ष‍ित है, मेरा पहाड़ भी तो मैला हो गया है

उत्तरकाशी में 12 वर्षीय निर्भया के साथ जो हैवानियत हुई है, उसने पूरी देवभूमि को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना के बारे में सुनने के बाद मेरा रोम-रोम सिहर उठा.

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हिल जात्रा: ये पि‍थोरागढ़ को मिली नेपाल की सौगात है

नेपाल और उत्तराखंड की सीमा ही नहीं, बल्क‍ि यहां के लोगों के दिल भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. आज भी एक छोटा नेपाल उत्तराखंड में बसता है.

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उत्तराखंड में यहां अपना घर बनाना चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी आज कूच कर गए हैं, लेक‍िन उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में अमर रहेंगे. और इन्हीं यादों का एक पन्ना उत्तराखंड में खुलता है.

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नेगी दा: जिनके गीत उत्तराखंड का इतिहास हैं

आज यानी 12 अगस्त को 1949 में पौड़ी गढ़वाल के पौड़ी गांव में नरेंद्र सिंह नेगी का जन्म हुआ था. नेगी दा ने अपने पहले गीत से ही जता दिया था कि वह पहाड़ के आम जन की पीड़ा अपनी गीतों में बयां करेंगे.

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