उत्तराखंड में यहां अपना घर बनाना चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और पक्ष-विपक्ष सबके चहेते अटल बिहारी वाजपेयी आज कूच कर गए हैं. उस दुनिया में जहां से अब वह लौट कर नहीं आएंगे, लेक‍िन उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में अमर रहेंगे. और इन्हीं यादों का एक पन्ना उत्तराखंड में खुलता है.

अटल ही वह प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने पहाड़ की पीड़ा को न सिर्फ समझा, बल्क‍ि उसे महसूस भी किया. इसी का परिणाम था कि सन 2000 में उत्तराखंड को राज्य का दर्जा दिलाने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई.atal34

वाजपेयी जी का उत्तराखंड से गहरा नाता था. वह हर साल कम से कम एक हफ्ते के लिए मसूरी जरूर आते थे. उनका देहरादून, मसूरी, नैनीताल और चंपावत और टिहरी गढ़वाल से खास लगाव था.

यहां हम अटल जी के उत्तराखंड से जुड़े कुड रोचक किस्से आपके सामने पेश कर रहे हैं.

जब अटल कार को मारने लगे धक्का
बात नवंबर, 1957 की है. अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून आने वाले थे. देहरादून के पीपल मंडी चौराहे पर एक फिएट कार बंद हो गई. कार देहरादून के प्रतिष्ठ‍ित कारोबारी नरेंद्र स्वरूप मित्तल चला रहे थे. कार बंद हुई तो मित्तल उसे धक्का देने के लिए नीचे उतर आए. जैसे ही वह उतरे, कार के पीछे का दरवाजा खुला और उसमें बैठे अटल भी धक्का मारने लग गए.

जिस दौरान अटल कार को धक्का दे रहे थे. उसी दौरान वहां लाउडस्पीकर पर अटल जी के देहरादून में सभा करने की घोषणा हो रही थी. atal2

यहां बनाने चाहते थे घर
अटल 1980 में ग्वालियर से लोकसभा चुनाव हार गए. इस तनाव को कम करने के लिए वह गंगोत्री की यात्रा पर आए. गंगोत्री जाने से पहले वह पुरानी टिहरी में तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेशचंद जैन के घर रुके थे.

इस दौरान उन्हें चंबा काफी पसंद आया और उन्होंने यहां पर एक घर बनाने की इच्छा जताई. हालांकि उसके बाद ऐसे समीकरण बने कि इस पर फिर कोई चर्चा नहीं हुई. atal1

‘बहुगुणा जी से डर लगता है’
अटल 1985 में भी पुरानी टिहरी आए थे. सुरेश चंद चैन ने अमर उजाला से बातचीत में एक किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि पर्यावरणविद् और चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुण को जब अटल जी से दिल्ली में मिलाया गया. तो उन्होंने बहुगुणा जी से मिलकर कहा था, ”भई, बहुगुणा जी से डर लगता है. ये कई दिन तक अनशन पर बैठ जाते हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी का उत्तराखंड से हमेशा एक खास लगाव था. इसीलिए वह सैकड़ों बार यहां आए. कभी जनसभाओं को संबोध‍ित करने तो कभी एक आम आदमी के तौर पर आत्मिक शांति हासिल करने.

मालिक से यही प्रार्थना करते हैं कि इस महापुरुष की आत्म को शांति प्रदान करे.

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