मैं सोचता था सिर्फ शहर ही असुरक्ष‍ित है, मेरा पहाड़ भी तो मैला हो गया है

विकास जोशी

उत्तरकाशी में 12 वर्षीय निर्भया के साथ जो हैवानियत हुई है, उसने पूरी देवभूमि को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना के बारे में सुनने के बाद मेरा रोम-रोम सिहर उठा.

मैं शहर में रहता हूं. अक्सर अपने परिजनों से ये कहता फिरता हूं कि हम अपने प्रदेश चले जाते हैं. क्योंकि ये शहर है. असुरक्ष‍ित है. वहां अपना गांव है. सुरक्ष‍ित है. लेक‍ि‍न अब मैं ये नहीं कह पाऊंगा. क्योंकि मेरी देवभूमि भी मैली हो गई है.

12 वर्षीय निर्भया के साथ हैवानियत करने वाला आख‍िर पुलिस की गिरफ्त में आ गया है. हत्यारा टिहरी जनपद के दीन का रहने वाला है. वह कुछ सालों से निर्भया के गांव में ही अपनी मां के साथ रहता था. मुकेश लाल ने अपना जुर्म कबूल भी लिया है.

लेक‍िन हालात बद से बद्तर होते जा रहे हैं. न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक महज 1 महीने के भीतर उत्तराखंड में तीन दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

देवभूमि की जिन शांत वादियों में ढोल-दमों की थाप पर हमारे देवता अवतरित होते हैं. उसी धरती पर एक 12 वर्षीय असहाय बालिका की इस तरह से निर्मम हत्या कर दी जाती है. उत्तराखंड का रिकॉर्ड हमेशा कम अपराध का रहा है. लेक‍िन अब हालात बदलने लगे हैं. खास महिलाओं के लिए.

न जंगल सुरक्ष‍ित और न घर
उनके लिए अब न जंगल सुरक्ष‍ित रह गए हैं और न ही घर. जंगल में घास काटने जाओ, तो कभी गुलदार तो कभी भालू श‍िकार बना लेता है. घर में रहो तो इंसान और रिश्तेदारों की शक्ल में छुपे ऐसे हैवान नोचने लग जाते हैं.

न्यूज 18 अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि इस साल की पहली छमाही में ही 306 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. जहां पर बच्चे-बच्च‍ियों के साथ जबरदस्ती और दुष्कर्म की घटनाएं सामने आई हैं.

प्रदेश सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है. जिन पहाड़ों पर कभी महिलाएं अकेले चलने का दम रखती थीं. आज वहां घर में रहना भी असुरक्ष‍ित होता जा रहा है. राज्य सरकार को पहाड़ में सुरक्षा कवच तैयार करना होगा.

हमें भी अपने बच्चों को समझाना होगा और उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाना सिखाना होगा. तब ही हमारी बहू-बेटियां सुरक्ष‍ित महसूस करेंगी.

 (आप आजतक न्यूज चैनल से जुड़े हैं. पिछले 5 सालोें से दिल्ली में पत्रकार के तौर पर कार्यरत हैं. लेखक के विचार निजी हैं. इनकी पूरी जिम्मेदारी लेखक की अपनी है. )

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