अगर कभी टिहरी डाम टूटा, तो आप सोच भी नहीं सकते इतना विनाश होगा!

केरल में बाढ़ के चलते हालात बेकाबू हो चुके हैं. यहां 370 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सात लाख से भी ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं. शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस बाढ़ से केरल को 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है.

फिलहाल केरल बाढ़ पीड़‍ितों की खातिर राहत कार्य किया जा रहा है. लेकिन इसी बीच कहा जा रहा है कि ये बाढ़ सिर्फ भारी बारिश के चलते नहीं, बल्क‍ि इंसानी गलती भी इसके लिए जिम्मेदार है.tehri1

बताया जा रहा है कि बांधों के संचालन में गड़बड़ी भी इस बाढ़ की एक वजह बनी है. बांधों से धीरे-धीरे पानी छोड़ने की बजाय जलाशय भर जाने पर छोड़ा गया. इससे जब वे तेज धाराएं निकलीं, तो वे सैकड़ों जिंदगियों को लीलती चली गईं.

फिर जिंदा हुआ सवाल
केरल में पैदा हुए हालातों को देखकर एक बार फिर सवाल उठने लगा है. अगर कभी टिहरी डाम टूटा, तो क्या मंजर और हश्र होगा. इस सवाल का जब हमने जवाब ढूंढा, तो जो सामने आया वो रुह कंपाने वाला है. और ये सवाल तब और पुख्ता हो जाता है, जब कई रिपोर्ट्स में इसकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं.

टिहरी डाम:
टिहरी में डाम बनाने की योजना की शुरुआत 1949 से हुई. ये वही साल था, जब पहली बार इसको लेकर बातचीत शुरू हुई. 1972 में इसके निर्माण को योजना आयोग (अब नीति आयोग) ने अनुमति दे दी. 1972 से ही लगातार टिहरी के लोग, पर्यावरणविद् और विशेषज्ञ इस योजना का विरोध कर रहे थे. लेक‍िन इन सब विरोध के स्वरों को दबाते हुए 2006 में डाम का पहला फेज पूरा कर लिया गया.ter

देश का सबसे बड़ा बांध है ये
यह देश का सबसे बड़ा बांध है. दुनिया में ये 5वें नंबर पर आता है. तकरीबन 117 अरब रुपये में इसे तैयार किया गया है. लेक‍िन इसकी असली कीमत टिहरी के लोगों ने चुकाई है. पुरानी टिहरी जलमग्न हो गई. तकरीब 100 से ज्यादा गांव पानी में समा गए और यहां के लोगों को अपने पुश्तैनी मकान और जमीन-जायदाद छोड़कर विस्थापित होना पड़ा.

टिहरी डाम को लेकर डर क्यों?
एक लेख‍िका और बुद्ध‍िजीवी हैं मधु पूर्णिमा किश्वर. उन्होंने मनुषी नाम की अपनी पत्र‍िका में एक लेख लिखा है. नवंबर, 1995 का ये लेख टिहरी डाम को लेकर बात करता है. इस लेख में उन्होंने टिहरी डाम को लेकर विस्तार से बात की है. Untitled-2 copy

इस रिपोर्ट के मुताबिक टिहरी डाम ऐसी जगह पर बना है, जो भूकंप के नजरिये से काफी ज्यादा संवेदनशील है. इस बात पर मुहर और भी पक्की हो जाती है, जब आप इतिहास उठाकर देखते हैं. गढ़वाल क्षेत्र में 1816 से 1991 के बीच 17 से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं. इनमें बाद बाद में आए छोटे-बड़े भूकंप शामिल नहीं हैं.

अगर कभी टूटा टिहरी डाम तो…
अगर कभी टिहरी डाम टूटता है. किसी भी वजह से. तो इससे होने वाली हान‍ि की आप कल्पना भी नहीं कर सकते. रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची पहाड़ी पर बने इस बांध को खाली होने में सिर्फ 22 मिनट का समय लगेगा.

महज 63 मिनटों के भीतर ऋष‍िकेश जल में 260 मीटर की गहराई में समा जाएगा. तुरंत बाद हरिद्वार भी जलमग्न हो जाएगा.

और महज 12 घंटों के भीतर टिहरी डाम का पानी बिजनौर, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर को भी जलमग्न कर देगा. इससे आप कल्पना कर सकते हैं कि लाखों लोगों की जानें जाएंगी. अरबों-खरबों की संपत्त‍ि का नुकसान होगा.

इससे पहले टूटा है कोई बांध?
मधु क‍िश्वर ने अपनी रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक के लीक हुए मेमो के हवाले से कई जानकारी दी है. इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क के इस मेमो ने इस दौरान भारत के बांधों को सबसे असुरक्ष‍ित करार दिया था. क्या इससे पहले देश में कोई बांध टूटा है? तो इस सवाल का जवाब है- हां.

मोर्बी आपदा:
नेटवर्क ने अपनी रिपोर्ट में मोर्बी आपदा का जिक्र किया है. बात है 11 अगस्त, 1979 की. इस दौरान भारी बारिश के चलते गुजरात में बाढ़ आ गई. मच्छु नदी पर बने इस बांध को भी बाढ़ ने अपना श‍िकार बना लिया. बाढ़ इतनी भयावह था कि यह बांध पूरी तरह से धराशाही हो गया. morbi

इसने नजदीक सटे इलाके मोर्बी को तबाह कर के रख दिया. नेटवर्क की मानें तो इस त्रासदी में 2 हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई. लेक‍िन अनाध‍िकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में मरने वालों की संख्या 25 हजार से भी ज्यादा थी.

ये था दुनिया का सबसे बड़ा बांध हादसा:
नेटवर्क ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के सबसे बड़े बांध हादसे का भी जिक्र किया है. चीन के हेनान प्रांत में अगस्त 1975 में यह सबसे भयानक हादसा हुआ.henan

यहां भारी बारिश के चलते 60 करोड़ क्यूबिक मीटर की क्षमता वाले दो बांध टूट गए. विकराल रूप धरे पानी ने 86 हजार से 2.30 लाख लोगों की जान ली. इसे अब तक का सबसे बड़ा बांध हादसा कहा जाता है.

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