ये अक्षय कुमार की फिल्म नहीं, उत्तराखंड की टॉयलेट: एक प्रेम कथा है…

सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनाना आम बात है. लेकिन फिल्म की काल्पनिक कहानी सच हो जाए. ये कम ही सुनाई देता है.

अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट: एक प्रेम कथा तो आप ने देखी ही होगी. इस फिल्म में अक्षय कुमार की पत्नी इसलिए घर छोड़ देती है, क्योंकि वहां शौचालय नहीं होता.

वह अपने पति को ये कहकर चली जाती है कि जब तक घर में शौचालय नहीं होगा, वह वापस नहीं आएगी. और इसके बाद फिल्म में अक्षय कुमार का किरदार शौचालय बनाने के काम में जुट जाता है.

जब ये फिल्म रिलीज होने वाली थी, इसी दौरान ऐसी ही घटना घटी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के किशनपुर जनपद में. यहां एक नवविवाहिता ने इसलिए ससुराल छोड़ दिया क्योंकि वहां शौचालय नहीं था.

इसके साथ ही उसने अपने पति को चेतावनी दे डाली कि जब तक घर में शौचालय नहीं होगा, तब तक वह वापस नहीं आएगी.

भाबर की ग्राम पंचायत लोकमणीपुर के शीतलपुर गांव निवासी हरीश सिंह की अप्रैल में ही शादी हुई थी. हरीश की माली हालत इतनी खराब थी कि उसके पास शौचालय बनाने के लिए पैसे नहीं थे. शादी के कुछ दिनों बाद ही पत्नी सोनिया घर में शौचालय बनाने की जिद करने लगी.

कई दिनों तक बोलने के बाद भी जब हरीश के कान में जूं नहीं रेंगी. तो उसकी पत्नी ने एक बड़ा कदम उठाने की ठान ली. सिर्फ हरीश के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव को एक बड़ा पाठ सिखाने का मन बना लिया.

शादी के करीब डेढ़ महीने बाद वह नवविवाहिता घर छोड़कर अपने मायके चली गई. ससुराल से निकलते वक्त उसने अपने पति से कहा कि जिस दिन शौचालय बन जाएगा, उस दिन वापस आ जाऊंगी. नहीं बनाया, तो मेरे वापस आने की उम्मीद मत रखना.

पत्नी का ये फरमान सुनकर हरीश ग्राम प्रधान के पास पहुंचा. ग्राम प्रधान पूनम मेहरा ने भी कहा कि अगर वह जमीन मुहैया करने के लिए तैयार हो जाता है, तो शौचालय बना दिया जाएगा.

इस पर हरीश ने एक दिन की भी देर न करते हुए जमीन शौचालय के लिए मुहैया कर दी. अब उसे उम्मीद है कि जल्द शौचालय बने, ताकि उसकी पत्नी वापस लौट आए.

अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट: एक प्रेम कथा के बारे में सोनिया ने शायद सुना भी नहीं होगा. लेकिन उसने अपने एक फैसले से इस फिल्म की कहानी को भी सच कर दिया है.

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