जेम्स बॉन्ड: जब पाकिस्तान के एजेंट बने अजीत डोभाल

जेम्स बॉन्ड का नाम तो आप ने जरूर सुना होगा, लेकिन आज हम आपको टीवी स्क्रीन पर दिखने वाले जेम्स बॉन्ड के बारे में नहीं, बल्कि रियल लाइफ के जेम्स बाॅन्ड के बारे में बता रहे हैं.

रियल लाइफ जेम्स बॉन्ड
देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को ही रियल लाइफ का जेम्स बॉन्ड कहा जाता है. इनकी जिंदगी किसी जासूसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है. सैकड़ों बार इन्होंने मौत को चकमा दिया है. आतंकियों के बीच उनका दोस्त बनकर उनका विनाश जीता है.

पाकिस्तान में की जासूसी:
दुश्मन देश में 7 साल से भी ज्यादा गुजारे लेकिन किसी को इसकी भनक भी नहीं हुई. उत्तराखंड में जन्मा भारत माता का ये लाल आज भी देश की सेवा में जुटा हुआ है.

चीन का मुंह किया बंद
डोकलाम को लेकर युद्ध की धमकी दे रहे चीन को उसके घुटनों पर ला चुके हैं. डोभाल चीन ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान को भी घुटनों के बल झुकने के लिए मजबूर कर चुके हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे ज्यादा विश्वास इन पर है।  उन्हें पता है जहां डोभाल होंगे, वहां भारत की जीत होनी तय है और यही डोकलाम के मामले में हुआ है।

इसीलिए कहा जाता है रियल लाइफ जेम्स बाॅन्ड
अजीत डोभाल की जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं है. वह पाकिस्तान में 7 साल से भी ज्यादा समय तक जासूस बने रहे. रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां वह स्थानीय लोगों के साथ घुलमिल जाते थे और लोगों का विश्वास जीतने के लिए मस्जिद जाया करते थे. डोभाल ने 7 साल यहां अंडर कवर रहकर भारत के खिलाफ आतंक को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई.

ऑपरेशन ब्लू थंडर
साल 1988. पंजाब स्थित गोल्डन टेंपल में आॅपरेशन ब्लैक थंडर चल रहा था. सुरक्षा बल को अंदर छुपे आतंकियों की गतिविधियों की जानकारी चाहिए थी. और डोभाल ने यह जानलेवा और खतरनाक काम अपने हाथ में ले लिया.

इसलिए ISI एजेंट बने डोभाल:
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट बनकर स्वर्ण मंदिर के अंदर गए. उन्होंने आतंकियों से कहा कि वह उनकी मदद के लिए वहां आए हैं। डोभाल ने बड़ी ही चालाकी से आतंकियों का विश्वास जीता और उनकी गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा बल को भेजी. इस तरह उन्होंने आॅपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.

यह पहली बार नहीं था कि जब उन्होंने जान हथेली पर रखकर कोई मिशन पूरा किया हो. उन्होंने ऐसे ही कई खतरनाक मिशन किए और कई बार मौत उनके काफी करीब से गुजरी. उनके पास पाकिस्तान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकियों से लोहा लेने का लंबा अनुभव है.

डोभाल पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर भारत पर दूसरा 26/11 जैसा आतंकी हमला हुआ, तो उसके हाथ से बलूचिस्तान छिन जाएगा.

कीर्ति चक्कर से सम्मानित पहले पुलिस अधि‍कारी
अजीत डोभाल का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ. वह केरल काडर के 1968 बैच के आईपीएस अफसर हैं. वह इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर भी रह चुके हैं. वह देश के पहले ऐसे पुलिस अफसर हैं, जिन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया.

डोभाल सिद्धांत
भारत सरकार का आतंकियों के खिलाफ जो कड़ा रुख है, वह डोभाल सिद्धांत के बदौलत है.. दरअसल 2014 और 2015 में डोभाल ने देश की रक्षा और विदेश नीति पर एक लेक्टर दिया था. उनका यही लेक्चर अब डोभाल सिद्धांत के तौर पर जाना जाता है. उनका सिद्धांत है कि आतंकियों और विरोधी देशों के खिलाफ कड़़ा रुख ही अपनाया जाना चाहिए.

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