दो भड़ों की कथा

किसी समय कुमाऊं में दो भड़ थे. एक भड़ काली कुमाऊं में और दूसरा पाली पछाऊं में रहता था. दोनों एक दूसरे के विषय में नहीं जानते थे. इसलिए उन्हें विश्वास था कि दुनिया में उनसे बड़ा शक्तिशाली कोई नहीं है. अतः दोनों की हुंकार कुमाऊं के दोनों छोरों को हिला देती थी, जिसका उन्हें घमण्ड हो चुका था.

लोग उनसे बहुत परेशान रहते थे-सभी उस दिन का इन्तजार कर रहे थे जिस दिन सेर को सवा सेर मिल जाएगा. उनकी भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में कोशिश रहती थी कि उनको टक्कर देने वाला मिले. स्वयं वे भी चाहते थे कि किसी बलशाली से उनका सामना हो.

दोनों अपने-अपने मुकाबले का भड़ ढूढ़ने निकल पड़े. अंततः उन्हें एक दूसरे का पता लग ही गया.

दोनों भड़ एक मैदान पर मिले. दोनों में भिड़ंत हुई. एक-दूसरे को पछाड़ देने के उद्देश्य से वे कई रात-दिन लड़ते रहे. दोनों बराबर के मुकाबले के थे इसलिए हार-जीत का फैसला होकर ही दम भरना था. जब कोई निर्णय होने की संभावनाएं नहीं बचीं तो उन्हें शांत करने का साहस भी देखने वालों में नहीं था.

अचानक तेज आंधी तूफान आने लगा. वे दोनों बेफिक्र अपने दांव-पेंचों को आजमाने में डटे रहे. तूफान आने का संदेह बढ़ गया था. परन्तु वे दोनों अपने अहंकार में आकंठ डूबे लड़ते रहे.

तूफान आ ही गया. बड़े-बड़े वृक्ष धराशायी होने लगे. मकान ढह गये. सब कुछ जो तूफान की चपेट में आया वह मीलों-मील उस भंवर के साथ चला गया. वे दोनों तूफान के आगे हार मानने वाले नहीं थे. दोनों उड़े और कहीं दूर किसी गांव में एक बुढ़िया जो ओखल कूट रही थी उसकी आंख में गिर गए.

बुढ़िया ने मूसल नीचे रखा और उन्हें आंख में फंसी घुन समझ कर बाहर निकाल फेंका. दोनों भड़ जब धड़ाम से नीचे गिरे तो उन्हें लगा जैसे उन्हें किसी पहाड़ से नीचे फेंक दिया गया हो. आश्चर्य से उन्होंने एक दूसरे को देखा. सामने बुढ़िया खड़ी थी.

उनके हाथ जुड़ गये, बोले- “हमें भ्रम हो चला था कि हमसे बड़ा शक्तिशाली दुनिया में कोई नहीं हो सकता. आपने उस भ्रम को तोड़ दिया. आपसे शक्तिशाली दूसरा कोई नहीं है-हम दोनों भी नहीं. आपने अपने आंख के कष्ट को भूलकर हमें जीवित छोड़ दिया. हमें क्षमा करें, आपसे बड़ा शक्तिशाली कोई नहीं हो सकता. ”

यह एक सामान्य कथा है. किंतु इससे जन जीवन में अद्भुत घटनाओं के प्रति विश्वास की झलक मिलती है. साथ ही यह कथा हमें शिक्षा देती है कि अपने किसी गुण को सर्वश्रेष्ठ समझने का घमंड कभी नहीं करना चाहिए.

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