उत्तराखंड को मिला 1.20 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, बदलेगी सूरत?

उत्तराखंड इन्वेस्टर सम‍िट का सोमवार को समापन हो गया. गृह मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थ‍िति में स‍म‍िट का समापन हुआ. इससे पहले मुख्यमंत्री त्र‍िवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि राज्य को कुल 1.20 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. इससे उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश विकास की ओर बढ़ेगा और यहां जारी पलायन रुकेगा.

पहाड़ी हिस्से के ल‍िए आया ज्यादा निवेश
इस दौरान रावत ने यह भी जानकारी दी कि इनमें से ज्यादातर प्रपोजल पहाड़ी भाग में निवेश के लिए साइन हुए हैं. रावत ने कहा, ”1.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. जिन समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया गया है. उनमें से ज्यादातर पहाड़ी भाग में निवेश के लिए किए गए हैं. ”

अडानी ग्रुप लाएगा मेट्रो लाइन
निवेश के इन प्रस्तावों में अडानी ग्रुप ने प्रदेश में सबसे ज्यादा निवेश करने का प्रस्ताव रखा है. ग्रुप के प्रस्ताव के मुताबिक वह राज्य में 6500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा. अडानी ग्रुप की इन पैसों को यहां मेट्रो रेल प्रोजेक्ट पर निवेश करने की योजना है. इसके अलावा ग्रुप एक हजार करोड़ रुपये पावर ट्रांसमिशन के अपग्रेडेशन पर खर्च करना चाहता है. 500 करोड़ में ग्रुप लॉजिस्ट‍िक पार्क तैयार करना चाहते हैं.

अडानी एंटरप्राइजेस के निदेशक प्रणव अडानी ने कहा कि हम उत्तराखंड में काफी ज्यादा संभावनाएं देखते हैं. पिछले वित्त वर्ष के दौरान यहां की अर्थव्यवस्था 11 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है. उन्होंने बताया, ”हमने खेती उत्पादन में भी एक समझौता ज्ञापन सरकार के साथ किया है.”

12 सेक्टर पर फोकस
बता दें कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए 12 सेक्टर पर फोकस किया है. इसमें आयुष, फर्मास्युटिकल्स, सूचना और प्रोद्योग‍िकी, हॉर्ट‍िकल्चर और फ्लोरीकल्चर, नेचुरल फाइबर्स, पर्यटन, फिल्म शूटिंग, बायोटेक्नोलोजी, अक्षय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबिल शामिल है.

…तो रुक जाएगा पलायन
1.20 लाख करोड़ के सभी प्रस्ताव अगर हकीकत बन जाते हैं, तो उत्तराखंड में बढ़ते पलायन को रोकना कोई मुश्क‍िल काम नहीं होगा. लोगों को अपने गांव और घर के आसपास ही रोजगार मिलेगा.

लेकिन डर जिस बात का है, वो ये है कि कहीं ये 1.20 लाख करोड़ रुपये का निवेश सिर्फ कागजों पर न रह जाए. अक्सर ऐसे समिट होते हैं और उनमें कारोबारी करोड़ों रुपये के निवेश का वादा तो कर जाते हैं, लेकिन फिर वह निवेश जमीन पर नहीं उतर पाता है.

इसकी कई वजहे हैं. कई बार यह इसलिए होता है क्योंकि उन्हें सरकार की तरफ से मंजूरी लेने में ही काफी ज्यादा समय लग जाता है. कुछ कारोबारी अपने निवेश की योजना बदल देते हैं. वह जहां ज्यादा फायदा होगा, वहां की तरफ बढ़ने लग जाते हैं.

खैर, अभी तो सम‍िट खत्म ही हुआ है. हालांकि इस समिट का आयोजन करना एक सार्थक प्रयास है. जिसके लिए राज्य सरकार की सराहना की जानी चाहिए. निवेश के प्रस्ताव भी काफी अच्छे हैं. अब सिर्फ इंतजार है, तो उस दिन का जब ये निवेश के प्रस्ताव जमीन पर उतरेंगे.

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