‘मेरी लाश पर बनेगा उत्तराखंड’ कहने वाला जब बना यहां का मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी का निधन हो गया है. दिन में उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया और शाम को उनका देहांत हो गया. तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था. यह वह वक्त था, जब उत्तर प्रदेश का भी गठन नहीं हुआ था.

1950 में इसे उत्तर प्रदेश का नाम लिया. 1950 वही साल था, जिससे उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग उठी थी. उत्तराखंड को अलग राज्य की मांग के अंगारों ने धीमे ही सही सुलगना शुरू कर दिया था. तब एनडी तिवारी छात्र नेता थे और राजनीति में सक्र‍िय हो चुके थे.

इसके ठीक 50 साल बाद 2000 में उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ. हालांकि अलग राज्य की मांग के लिए कई लोगों को अपने प्राण त्यागने पड़े. लेकिन एनडी तिवारी कभी भी अलग राज्य बनाने के पक्ष में नहीं थे. उन्होंने हमेशा इसका विरोध किया. 90 के दशक में उत्तराखंड आंदोलन जब उफान पर था, तब एनडी तिवारी ने कहा था, ”मेरी लाश पर बनेगा उत्तराखंड.”

खैर, 2000 में उत्तराखंड बना और अलग राज्य के धुर विरोधी एनडी तिवारी को यहां का मुख्यमंत्री बनाया गया. लेक‍िन जब उन्होंने सत्ता संभाली, तो विरोधी नहीं, एक सफल नेतृत्व नजर आया.

वह उत्तराखंड के इकलौते मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया. विवादों से इतर तिवारी के सम्मान पर कभी कोई आंच नहीं आयी. विकास को लेकर उनकी सोच और उसे दिशा देने की काबिलियत के कारण उनके ऊंचे कद का मुकाबला कोई भी नहीं कर पाया. इसी वजह से उन्हें ‘विकास पुरूष’ का नाम भी दिया गया है. जिसका फायदा उत्तराखंड को भी मिला.

माना जाता है कि 2002 में उत्तराखंड को जो औद्योगिक पैकेज मिला. वह उनके तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अच्छे संबंधों की बदौलत मिला. इसकी बदौलत हरिद्वार और पंतनगर में विश्वस्तरीय औद्योगिक संस्थान स्थापित हुए. इससे रोजगार तो पैदा हुए ही, बल्क‍ि राज्य की स्थ‍िति भी काफी मजबूत हुई.

यहां तक कि रामदेव के पतंजलि योगपीठ को भी ऊंचाइयों पर पहुंचाने में इनका ही हाथ माना जाता है. इनके कार्यकाल में पतंजलि को हरिद्वार में कम दरों पर भूमि आवंटित की गई.

अपने कार्यकाल में उन्होंने लाल बत्त‍ियां भी खूब बांटी. कार्यकाल के आख‍िरी दौर में वह अपने साथी नेताओं को खुश करते नजर आए. इसी वजह से नरेंद्र सिंह नेगी ने ‘नौछमी नारैणा’ गीत गाया. और शायद आपको पता न हो, लेकिन नारायण दत्त तिवारी को भी उनकी करीबी हमेशा नरैण बुलाते हैं.

नारायण दत्त तिवारी की शख्स‍ियत चाहे कितनी ही विवादित रही हो, लेकिन एक राजनेता के तौर पर उन्होंने खुद को साबित किया है. उत्तराखंड के ग्रामीण भाग में सड़कों को पहुंचाने का श्रेय उन्हें भी जाता है.

छ‍िबड़ाट उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धां‍जलि अर्प‍ित करता है. और उम्मीद करता है कि उत्तराखंड में और विकास पुरुष पैदा हों, जो इस धरा को स्वर्ग बना सकें.

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