बेंगलुरु: टिहरी के जगदीप से जब जीत नहीं पाए, तो कायरों ने कर दी उनकी हत्या

अपने घरदेश से दूर रहकर परदेशों में दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के ल‍िए पहुंचे उत्तराखंडी युवाओं की सुरक्षा को लेकर अब सरकार को चिंता करने की जरूरत है. 19 अक्टूबर को बेंगलुरु में काम करने वाले टिहरी गढ़वाल के जगदीप की नृशंस हत्या कर दी गई.

टिहरी के जगदीगाड गांव के रहने वाले जगदीप कुंवर बेंगलुरू में एक होटल में नौकरी करते थे. इस घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है और मातम का माहौल है.

जगदीप कुंवर के म‍ित्रों की तरफ से सोशल मीडिया पर उस रात का पूरा ब्यौरा दिया गया है. जिस रात उनकी हत्या हुई थी. मित्रों के मुताबिक 19 अक्टूबर की रात को जगदीप होटल से अपने रूम लौट रहे थे. रात के सुनसान अंधेरे में उन्हें अचानक गुंडों ने घेर ल‍िया. गुंडों ने जगदीप से उनका मोबाइल और पैसे छीनने की कोश‍िश की, लेक‍िन बहादुर जगदीप ने ऐसा होने नहीं दिया.

जगदीप ने लगातार उनके साथ संघर्ष किया. जब जगदीप उन पर भारी पड़ने लगे, तो उन गुंडों में से एक ने पीछे से उनके गले पर धारदार हथ‍ियार से वार कर दिया. गले पर वार होने की वजह से जगदीप के प्राण चले गए.

बहादुर थे जगदीप:
जगदीप की बहादुरी ही उसका काल बन गई. कायरों ने पीछे से आकर उसके गले पर वार कर दिया. वार इतना गहरा था कि इससे उनकी जान ही चली गई. जगदीप की हत्या के बाद रोशन रतुड़ी उनकी मदद की खातिर आगे आए हैं. उन्होंने कर्नाटक सरकार से जगदीप को इंसाफ दिलाने की मांग की है.

रोशन रतुड़ी ने उठाई आवाज
रोशन रतुड़ी के मुताबिक वहां कुछ नशेड़‍ियों ने जगदीप कुंवर की हत्या की है. हालांकि अभी इस मामले में कोई ठोस एक्शन लेने की खबर सामने नहीं आई है. दूसरी तरफ, उत्तराखंड के प्रतिष्ठ‍ित अखबारों की न्यूज साइट पर यह खबर कहीं नजर नहीं आ रही है.

सोशल मीडिया पर उठ रही इंसाफ की मांग
सोशल मीडिया पर लगातार सामाजिक कार्यकर्ता रोशल रतुड़ी समेत अन्य लोग जगदीप के हत्यारों को सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं. लेक‍िन अभी तक इस मामले में न उत्तराखंड सरकार की तरफ से ही कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही यहां का मीडिया इस मामले को बड़े स्तर पर उठा रहा है.

छ‍िबड़ाट जगदीप कुंवर की बहादुरी को सलाम करता है. साथ ही उम्मीद करता है कि आगे किसी उत्तराखंडी भाई को ऐसी घटना से रूबरू ना होना पड़े.

चिंता इसलिए और भी बढ़ जाती है कि हमारे उत्तराखंड के सैकड़ों भाई होटल इंडस्ट्री में काम करते हैं. वे लोग अपने होटल से रात-बिरात ही आते हैं. ऐसे में उन पर भी ऐसे खतरे बने रहते हैं.

अब सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में कार्रवाई के लिए कर्नाटक सरकार पर दबाव बनाए और जगदीप के परिवार को सहारा दे.

Leave a Reply