…जब उत्तराखंड आंदोलन की वजह से अटक गई थी त्र‍िवेंद्र सिंह रावत की शादी!

उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ी एक और किश्त हम यहां पेश कर रहे हैं. और ये किश्त राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री त्र‍िवेंद्र सिंह रावत से जुड़ी है. उत्तराखंड में जब पृथक राज्य का आंदोलन चरम पर था, उसी दौरान त्र‍िवेंद्र सिंह रावत की शादी तय हुई थी.

त्र‍िवेंद्र सिंह रावत का विवाह 1994 में राज्य आंदोलन के दौरान हुआ. उनके बड़े भाई वीरेंद्र सिंह रावत ने हिंदुस्तान अखबार से इस संबंध में बात की.

वह बताते हैं कि त्रिवेंद्र की शादी 10 अक्तूबर 1994 को हुई. इस समय यहां पर आंदोलन तेज हो चुका था. 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर कांड के बाद लोगों में गुस्सा था. हर तरफ कर्फ्यू लगा हुआ था. पौड़ी शहर भी इससे अछूता नहीं था.

त्र‍िवेंद्र की बारात पौड़ी शहर के कांडई गांव में जानी थी. शादी पहले से ही तय थी. इसलिए टालना भी संभव नहीं था. सब चिंता में डूबे हुए थे. आख‍िर वो दिन भी आ ही गया, जब त्रिवेंद्र की बारात उनके पैतृक गांव खैरासेण से कांडई जानी थी.

शादी रद्द करने की नौबत आने से पहले ही एक राहत भरी खबर आ गई. 10 अक्टूबर को कुछ घंटों के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई. इसके बाद घर वालों ने जल्दी से जल्दी शादी की रस्में निभाईं. और बारात दुल्हन को लेकर वापस अपने घर लौटी.

और इस तरह आज राज्य के मुख्यमंत्री बने त्र‍िवेंद्र सिंह रावत ने भी पृथक राज्य आंदोलन में थोड़ी ही सही, तकलीफ जरूर झेली. त्र‍िवेंद्र सिंह रावत की पत्नी सुनीता श‍िक्ष‍िका हैं. वह देहरादून में पढ़ाती हैं.

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