उत्तराखंड का वो ‘अंग्रेज’, जिसने जीता दुनिया का सर्वश्रेष्ठ नोबेल पुरस्कार

दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार है नोबेल प्राइज।… भारत में यह रविंद्रनाथ टैगोर और कैलाश सत्यार्थी समेत कुछ ही लोगों को हासिल हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के एक शख्स को भी नोबेल पुरस्कार मिल चुका है? वो भले ही अंग्रेज था, पर उसका उत्तराखंड से अटूट रिश्ता था और जन्म से आखिरी तक ये नाता बना रहा।… उनका नाम था, रोनल्ड रॉस और जब आप उनका काम जानेंगे तो आपको और भी गर्व होगा।

बात १८५७ की है. ये वो वक्त था, जब भारत में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बज चुका था।… देशभर में अंग्रेंजों के खिलाफ आक्रोश फैल चुका था।…इसी बीच, उत्तराखंड के अल्मोडा में एक अंग्रेजी सेना के मेजर के घर पर १३ मई को एक बच्चे का जन्म हुआ।… इसका नाम रोनल्ड रॉस रखा गया।… और बाद में रॉस को १९०२ में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार नोबेल मिला।….

उत्तराखंड में जन्म लेने के बाद पिता ने पढाई के लिए उन्हें ब्रिटेन भेज दिया।… यहां से जब वापस भारत लौटे, तो वह एक कवि बन चुके थे. बाद में उन्होंने पिता के कहने पर मेडिकल क्षेत्र में काम करना शुरू किया।… और उन्होंने अपने ग्यान व मेहनत के बूते मलेरिया की दवाई तैयार की….

जी हां… आज अगर मलेरिया का इलाज संभव हो पाया है, तो वो सिर्फ रॉस की वजह से है. उनकी रिसर्च ने ही मलेरिया का इलाज ढूंढना संभव हुआ. बाद में १९०२ में उन्हें अपनी इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।….

रोनल्ड रॉस अथवा मॉस्किट्यो रॉस का देहांत १९३२ में हुआ. अपनी आखिरी सांस तक उन्हें अपनी जन्मभूमि अथवा उत्तराखंड से लगाव रहा। … सभी पहाडि़यों की तरह वह भी पलायन कर दिल्ली मुंबई में अपनी रिसर्च का काम कर रहे थे।

हमें गर्व है कि मलेरिया जैसी बीमारी का इलाज ढूंढने वाले शख्स हमारे पहाड़ में जन्मे थे और हमेशा अपनी जन्मभूमि से उनका लगाव रहा.

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