उत्तराखंड की बेटी कैसे बनी ‘मदर ऑफ पाकिस्तान’?

बेगम लियाकत अली खान को मदर ऑफ पाकिस्तान भी कहा जाता है। वह पाकिस्तान की पहली महिला थीं, जिन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने और सत्ता में पुरुषों के मुकाबले खड़े होने के लिए तैयार किया। अपने पति पाक के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान यानी  के साथ मिलकर उन्होेंने एक नया पाकिस्तान तैयार करने में मदद की। वह पाकिस्तान के लिए कई देशों में राजदूत रहने वाली पहली महिला थीं.

वह पहली महिला गर्वनर और कराची यूनिवर्सिटी की पहली महिला चांसलर थीं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड से सम्मानित किया और ये अवॉर्ड हासिल करने वाली भी वह पहली महिला थीं। उन्होंने अपने पूरे जीवन भर पाकिस्तान और यहां की महिलाओं की खातिर काम किया। जीवन के आखिरी क्षण तक वह पाकिस्तान की राजनीति में एक्टिव रहीं और सरकार में कई अहम पदों पर काबिज रहीं। पाकिस्तान को इसकी उंचाइयों पर पहुंचाने वाली ये महिला उत्तराखंड की थी. जी हां… उत्तराखंड की।

शीला पंत था नाम
बेगम लियाकत अली खान का जन्म १३ फरवरी, १९०५ को अल्मोड़ा में हुआ। उनका नाम शीला अाइरिन पंत था। उनके पिता हेक्टर पंत ब्रिटिश सेना में मेजर जनरल थे। वैसे तो हेक्टर पंत कुमाऊंनी ब्राह्मण थे, लेकिन १८८७ में उनका परिवार धर्म परिवर्तन कर इसाई बन गया।

शीला ने कुबूला इस्लाम

शीला आइरीन पंत ने लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। वह दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर बनीं। इसी दौरान १९३१ में उनकी मुलाकात लियाकत अली खान से हुई। १९३२ में आइरीन ने लियाकत अली खान से शादी की। विवाह के साथ ही उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया। और अपना नाम बदलकर राणा लियाकत अली खान कर दिया।

अलग पाकिस्तान कि हिमायती
इसी दौरान वह मुस्लिम लीग का हिस्सा बनीं और उन्होंने भी अलग पाकिस्तान के लिए संघर्ष शुरू किया।  १९४७ में जब पाकिस्तान बना, तब उन्होंने अपने पति देश के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के साथ पाकिस्तान को बदलने में अहम भूमिका निभाई।

आइरीन पंत यानी बेगम लियाकत अली खान ने १३ जून, १९९० को इस दुनिया को अलविदा कहा। दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हुआ।

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