संघ ने मुझे क्या दिया? एक RSS स्वयंसेवक के मन की बात

विवेकानंद। उत्तरकाशी से
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक संगठन ही नहीं बल्कि एक परिवार है। संघ से जुड़ने के बाद व्यक्ति में कई तरह के बदलाव आते हैं।

1- जब कोई व्यक्ति संघ का स्वयंसेवक बनता है तो सबसे प्रथम परिवर्तन उसकी दिनचर्या में होता है। उसे सुबह 5 बजे शाखा जाना ,समय के अनुसार शाखा में योग, सूर्य, नमस्कार, समता(परेड), दंड, नियुद्ध (कराटे) आदि सीखना और करना होता है।

2- शाखा में प्रतिदिन कई तरह के खेल खेलने और सीखने को मिलते हैं। यहां 400 से ज्यादा खेल खेलने को मिलते हैं। इनकी बदौलत ना सिर्फ मनोरंजन होता है बल्कि तन और मन भी स्वस्थ रहता है।

3 – संघ में जाने के बाद एक व्यक्ति में निडरता और साहस का सृजन होता है।

4 संघ में जुड़ने से सामूहिकता का भाव आता है। संघ में सभी स्वयंसेवक साथ खेलते हैं। एक साथ मिलकर काम करते हैं।

5 – संघ में जुड़ने से व्यक्ति के अंदर समरसता का भाव आता है। संघ के वर्गो में शामिल स्वयंसेवकों को कभी भी एक दूसरे की जाति का पता नही होता है।- शाखा में जाने से बौद्धिक स्तर मजबूत होता है। बच्चों को वीर पुरुषों की कहानियां और उनकी शौर्य गाथायें सुनाई जाती हैं।

7- संघ का स्वयंसेवक बनने के बाद व्यक्ति के अन्दर समाज की सेवा करने का बीज पड़ता है। इससे वह अपना अधिकतर समय समाजिक कार्यों में लगाता है।

इस तरह संघ आपको निजी स्तर पर मजबूत करने और राष्ट्र हित के लिए आछ नागरिक गढ़ने का काम करता है।

विवेकानंद मैठाणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। RSS और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर अपनी बात मुखर हो कर रखते हैं।

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