पप्पू कार्की की वजह से इस स्कूल में कुछ ऐसा हुआ, जो हर स्कूल में होना चाहिए

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में कुछ बच्चे कुमाऊंनी प्रार्थना गा रहे थे। ये प्रार्थना स्कूल में गाई जा रही थी। ये वीडियो सोशल मीडिया काफी वायरल हुआ था। लेकिन इस वीडियो को देखा तो सबने पर ये है कहां का है, ये किसी को नहीं पता। तो आगे पढ़ते रहिए और जानिए इसका पप्पू कार्की से क्या नाता है?

कहां का है ये वीडियो?

ये वीडियो जो सोशल मीडिया पर वायहर हुआ है। ये पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग के एक स्कूल का है। यहां पर बच्चे हर सुबह कुमाऊंनी भाषा में प्रार्थना गाते हैं। बच्चों की इस प्रार्थना को सुनने के लिए गांव के लोग भी स्कूल के आसपास जमा हो जाते हैं। और हो भी क्यों न। किसी स्कूल में पहाड़ी भाषा में प्रार्थना बोली जा रही है।… लेकिन इस स्कूल में हमेशा से कुमाऊंनी में प्रार्थना नहीं होती थी। इसकी शुरुआत दिवंगत लोकगायक पप्पू कार्की की वजह से हुई।  

पप्पू दा को श्रद्धांजलि है ये प्रार्थना

दरअसल पिछले साल जून महीने में पप्पू कार्की का एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। पूरे देश में शोक की लहर पसर गई। सभी लोगों ने पप्पू दा को अपने-अपने तरीके से याद किया। लेकिन बेरीनाग के इस स्कूल ने पप्पू दा को श्रद्धांजलि देने के लिए एक अनोखी पहल की। स्कूल के बच्चों और शिक्षकों ने मिलकर तय किया कि वे पप्पू कार्की को कुमाऊंनी भाषा में प्रार्थना गाकर श्रद्धांजलि देंगे। तब से स्कूल की हर सुबह को पप्पू दा को श्रद्धांजलि स्वरूप ये प्रार्थना गाई जाती है। और पप्पू दा को याद किया जाता है। 

प्रार्थना भी पप्पू दा से जुड़ी है

जब आप इस प्रार्थना को सुनते हैं तो इसमें वीणा वादिनी सरस्वती मां का वंदन किया जा रहा है। ये प्रार्थना भी पप्पू दा से जुड़ी है। अगर आप ने गौर किया होगा  तो इस प्रार्थना को पप्पू दा के ‘सुन रे दगडिया’ गाने की पैरोडी पर बनाया गया है।

पप्पू दा को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रार्थना क्यों?

अब आप ये सोच सकते हैं कि दिवगंत पप्पू दा को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रार्थना ही क्यों चुनी गई। तो इसकी एक ही और बहुत अहम वजह है। दरअसल पप्पू कार्की को कुमाऊं मंडल के उन गायकों में सबसे आगे रखा जाता है, जिन्होंने कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण के लिए कदम उठाए… उन्होंने अपने गीतों के जरिये इस भाषा को देश और दुनिया तक पहुंचाया।… वह हमेशा अपनी भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहे। यही वजह है कि इस स्कूल के छात्रों ने पप्पू दा को इस प्रार्थना के जरिये श्रद्धांजलि दी।…

पप्पू दा भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके गाने और उनके प्रयास आज भी उत्तराखंड का नाम ऊंचा करने में जुटे हुए हैं। जिस तरह बेरीनाग के इस स्कूल ने कुमाऊंनी में प्रार्थना गाई है।उसी तरह उत्तराखंड के हर स्कूल में पहाड़ी भाषा में प्रार्थना गाई जानी चाहिए… इससे आने वाली पीढ़ी अपनी मातृभाषा में बात करने के लिए प्रेरित होगी और लुप्त होती हमारी भाषाओं को बचाया जा सकेगा।   

वीडियो देखें

Leave a Reply