हिमाचल की थाती: आजाद भारत का पहला वोट और पहला वोटर

भारत 1947 में आजाद हुआ। 1952 में पहला चुनाव हुआ। पूरे देश के लिए वैसे तो चुनाव फरवरी-मार्च, 1952 में होना था, लेकिन हिमाचल के लिए नहीं। हिमाचल प्रदेश में 5 महीने पहले ही चुनाव हो गए थे। इस तरह हिमाचल प्रदेश पहला ऐसा राज्य बना, जहां सबसे पहले वोट पड़े। और यहीं पड़ा पहला वोट। शंभु शरण नेगी बने पहले वोटर।    

श्याम शरण नेगी
श्याम शरण नेगी देश के वो पहले नागरिक हैं, जिन्होंने सबसे पहले वोट 19। नेगी 100 साल के हो चुके हैं। जीवन के इतने लंबे सफर में वो कभी भी वोट डालने से नहीं चूके। नेगी ने ही देश के पहले चुनाव की और पहले वोट की कहानी सुनाई।

बीबीसी हिंदी से बात करते हुए श्याम शरण नेगी ने बताया कि वैसे तो देश में चुनाव फरवरी-मार्च, 1952 में हुए लेकिन हिमाचल में 5 महीने पहले ही चुनाव कराए गए। इस तरह देश में सबसे पहले वोट हिमाचल में पड़े। 

नेगी ने बताया कि हिमाचल में स्वतंत्र भारत के लिए चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। इस दौराना झाड़े और बर्फबारी की आशंका के चलते हिमाचल के किन्नौर में 25 अक्तूबर, 1951 को वोट डाले गए थे।

कैसा था पहला चुनाव
नेगी इस दौरान पास के गांव मूरांग में स्कूली शिक्षक थे। उनका गांव कल्पा (तब चिन्नी) था। उन्हें वोट डालने के लिए यहीं जाना था। अगर वोट डालने के लिए कल्पा जाते, तो मूरांग में चुनावी ड्यूटी नहीं कर पाते। इसके बाद वह कल्पा के मतदान केंद्र में पहुंचे। यहां उन्होंने मतदान अधिकारियों से अपील की कि उन्हें वक्त से पहले वोट डालने दे दिया जाए। क्योंकि उन्हें मूरांग में इलेक्शन ड्यूटी पर जाना है।  

नेगी की अपील पर चुनाव अधिकारी तैयार हो गए। इस तरह शाम शरण नेगी ने वोटिंग के 7 बजे के समय से पहले वोट डाला। इसके बाद वह १० किलोमीटर दूर मूरांग में अपनी ड्यूटी निभाई। 

इस तरह वह देश के पहले वोटर बने। आज चुनाव आयोग ने उन्हें देश में चुनाव का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। और बनाए भी क्यों न। आज 100 के पार होने के बाद भी उनके जोश में कोई कमी नहीं आई है। और उन्हें 19 मई का बेसब्री से इंतजार है। जिस दिन मंडी लोकसभा क्षेत्र में वोट डाले जाएंगे। 

इसके बाद से नेगी ने एक भी चुनाव मिस नहीं किया, चाहे वह पंचायत का चुनाव रहा हो या फिर राज्य विधानसभा का चुनाव हो या फिर संसदीय चुनाव हो. उनका पोलिंग बूथ नंबर कल्पा 51 है, जहां कुल 928 मतदाता हैं, जिनमें 467 महिलाएं शामिल हैं. यह बूथ नेगी के घर से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है. हालांकि पहले उनका बूथ महज 50 मीटर की दूरी पर था. लेकिन अब नेगी अपने बेटे के साथ नए घर में रहते हैं, तो दूरी थोड़ी बढ़ गई है.

नेगी का जन्म पहली जुलाई, 1917 को हुआ था. वे भारत के सबसे बुर्जुग वोटर हैं. उन्हें कभी इसका एहसास नहीं था कि एक दिन युवा मतदाताओं को मोटिवेट करने के लिए उनका उदाहरण दिया जाएगा.

नेगी बताते हैं, “जब मेरे जैसा बुजुर्ग आदमी मतदान के दिन बूथ जा सकता है तो दूसरे क्यों नहीं जा सकते. निश्चित तौर पर, युवा मेरे जीवन से यह सीख ले सकते हैं.”

Leave a Reply