जिम कार्बेट: पहाड़ का रक्षक, लोगों का देवता

बात 1986 की है। कुमाऊं में एक हॉलीवुड फिल्म की शूटिंग चल रही थी। इसमें हॉलीवुड का एक मशहूर कलाकार शिकारी और वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाले जिम कॉर्बेट का किरदार निभा रहा था। एक दिन शूटिंग के दौरान एक बूढ़ा आदमी आया और उस कलाकार से मिल कर काफी ज्यादा खुश हो गया।

वो बार-बार उस कलाकार को जिम कारपेट के नाम से पुकारता। कलाकार कहता कि वो जिम कार्बेट नहीं है, लेकिन वो बूढ़ा बार-बार एक ही बात कहता, “मुझे मालूम था कि एक दिन आप आओगे और आज आप आ गए।”

आप ये जरूर सोचेंगे कि वो बूढ़ा पागल होगा। लेकिन जिम कार्बेट के प्रति ये उसका पागलपन ही था, जिसके बूते वह दो दिन पैदल चलकर उस कलाकार से मिलने पहुंचा था। ये पागलपन सिर्फ उस बूढ़े शख्स में नहीं है, बल्कि जो भी जिम कार्बेट के साथ रहा है. उनके दौर का वक्त जिया है, वे सब उनके लिए पागल हैं।

जिस फिल्म का वो कलाकार था, वो एक हॉलीवुड फिल्म थी। और ये फिल्म न सिर्फ उत्तराखंड में बनी है, बल्कि इसमें उत्तराखंड की व्यथा भी पेश की गई है।

आज जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को जानते हैं, वो पहले शिकारी और बाद में वन्य संरक्षण में जुटे जिम कार्बेट के नाम पर बना है। भारत के आजाद होने के बाद जिम केन्या चले गए। वो जीवन के आखिरी क्षण तक वहीं रहे, लेकिन उत्तराखंड से कभी उनका लगाव खत्म नहीं हुआ।

जिम कार्बेट और उनके परिवार का पूरा जीवन उत्तराखंड में ही गुजरा। बचपन में उन्होंने शिकार करना सीखा। मजे के लिए किए जाने वाला शिकार फिर जरूरत बन गया। गांव में मनस्वाग लग गया। मनस्वाग यानी गांव में शेर का हमले बढ़ना।

जिम कार्बेट ने कुमाऊं के न जाने कितने लोगों को आदमखोर शेरों के चंगुल से बचाया।

और हां…जो फिल्म उत्तराखंड के कुमाऊं में शूट हो रही थी। यह फिल्म ‘द मैन इटर्स ऑफ कुमाऊं’ थी। द मैन इटर्स ऑफ कुमाऊं जिम कार्बेट की ही किताब है। ये फिल्म जिम कार्बेट के जीवन पर आधारित फिल्म है। जिस तरह जिम कार्बेट ने अपना 90 फीसदी जीवन यहां बिताया।

उसी तरह ये फिल्म भी 90 फीसदी यहीं शूट की गई। न सिर्फ शूट की गई, बल्कि यहां का कथानक भी इसमें शामिल किया गया।

नीचे दिए वीडियो में इसी फिल्म में गाया गया एक गाना पेश किया गया है। इस गाने में जिम कार्बेट की तारीफ की जा रही है।

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