क्या ऐसे ‘पढ़ेगा इंडिया-बढ़ेगा इंडिया?’

पूरे देश में पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया का नारा लगाया जाता है, लेकिन ये सिर्फ नारा ही साबित हो रहा है। पहले पिथौरागढ़ में छात्र पुस्तकों की खातिर सड़कों पर उतरे थे। अब टिहरी गढ़वाल जिले की घनसाली तहसील के भिलंगना ब्लॉक में बच्चे सड़क पर उतर आए हैं। वजह है- शिक्षा और शिक्षा के ठेकेदारों की अनदेखी

उत्तराखंड के टिहरी जिले की भिलंगना ब्लॉक में हलचल मची हुई है। ये हलचल मचाई है कुछ बच्चों ने, जो शिक्षा के अपने अधिकार की खातिर लड़ रहे हैं। घनसाली तहसील के भिलंगना ब्लॉक के धोपड़धार में स्थित राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज के बच्चे सड़क पर उतर आए हैं। 26 नवंबर से कॉलेज के बच्चे कॉलेज अटेंड करने के बाद मुख्य बाजार में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

दरअसल धोपड़धार स्थित राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज में 8 विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। कुछ विषयों के लिए शिक्षकों का पद 2009 से 2017 के बीच खाली हो गया था। लेकिन अब तक इन पर कोई भर्ती नहीं हुई है। शिक्षकों की कमी का ये सिलसिला खत्म होने की बजाय बढ़ा ही है। सन 2009 में जहां सिर्फ एक शिक्षक पद खाली था। आज 2019 में इनकी संख्या 8 हो गई है।

आंदोलन की एक तस्वीर

आंदोलन की एक तस्वीर

कॉलेज में प्रिंसिपल ही नहीं

सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्कूल में प्रिंसिपल भी नहीं हैं। आंदोलन से जुड़े संजय बडोनी ने बताया कि 29 जुलाई, 2019 को इस संबंध में शिक्षा निदेशालय को ज्ञापन सौंपा गया था। लेकिन इस मामले में कोई भी एक्शन नहीं लिया गया। काफी इंतजार करने के बाद छात्रों ने 25 नवंबर को खंड शिक्षा अधिकारी तक बात पहुंचाई। जिलाधिकारी तक भी बात पहुंचा दी गई है।जिलाधिकारी ने आश्वासन तो दिया है लेकिन इस बार बच्चे रुकना नहीं चाहते।

आंदोलन में उतरे लोग

आंदोलन में उतरे लोग

बच्चे सड़क पर उतरते हैं। हाथ में तख्ती लेकर सरकार और प्रशासन से शिक्षकों की नियुक्ति की गुहार लगा रहे हैं। ‘हे सरकार बजट न व्यर्थ करो, शिक्षा पर भी कुछ खर्च करो’, पढ़ लिखकर आगे बढ़ेंगे, बिना शिक्षक कैसे पढ़ेंगे? … जैसे नारों से छात्र अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं.

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी नित्यनंद कोठियाल ने बताया कि धोपड़धार स्थित इस कॉलेज में वर्तमान में 6 से 12वीं की कक्षाएं चलती हैं। इस कॉलेज में क्षेत्र के 10 से भी ज्यादा गांवों के बच्चे पढ़ते हैं। सिर्फ यही नहीं, इन गांवों के छात्रों के लिए 12वीं की पढ़ाई के लिए यहां ये एकमात्र कॉलेज है। कॉलेज में मौजूदा समय में करीब 520 छात्र पढ़ते हैं। लेकिन शिक्षकों की लगातार घटती संख्या से छात्र रोष में हैं।

पोस्टरों के जरिये विरोध

पोस्टरों के जरिये विरोध

आंदोलन से जुड़े बच्चों का कहना है कि जब तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती। तब तक हम रुकेंगे नहीं। छात्रों का कहना है कि इस बार आंदोलन रुका तो शायद फिर से शिक्षकों की नियुक्ति की बात ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी। बच्चे 26 नवंबर से हर दिन धोपड़धार बाजार में जमा होते हैं और पोस्टर, नारों और कविताओं के जरिये अपनी बात रखते हैं।

बच्चों के इस आंदोलन को अब अभिभावकों का भी साथ मिलने लगा है। बड़ी संख्या में अभिभावक भी बच्चों के इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।

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