#Lockdown: मुख्यमंत्री जी… जरा इन युवाओं की भी सुन लें

कोरोना वायरस के कहर के चलते पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन लगा हुआ है। हर किसी के हित में किया गया ये लॉकडाउन कई लोगों के लिए मुसीबत भी बना है। दिहाड़ी-मजदूरी और होटलों में काम करने वालों के लिए ये मुश्किलों भरा दौर है। कुछ ऐसे ही हालात से गुजर रहे हैं मुंबई में फंसे कई उत्तराखंडी युवा।

मुंबई में होटल इंडस्ट्री में काम करने वाले ये युवा सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं। दरअसल लॉकडाउन के चलते मुंबई के ज्यादातर होटल बंद हैं। ऐसे में इन होटलों में काम करने वाले कई युवाओं के पास नौकरी नहीं है। कुछ युवाओं को उन्हें होटल से कोई तनख्वाह भी नहीं मिल रही है। ऐसे में इनके सामने लॉकडाउन के दौरान जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है।

इन्हीं युवाओं में से एक चंद्रप्रकाश मैठाणी ने छिबड़ाट से बात करते हुए कहा कि हम लॉकडाउन का समर्थन करते हैं। ये हमारी भलाई के लिए ही है, लेकिन अब हमारे लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। वहीं, रामप्रसाद रतुड़ी कहते हैं कि जितने पैसे थे, वो धीरे-धीरे खत्म होने लगे हैं। अब आगे तनख्वाह नहीं आ रही है तो ऐसे में धीरे-धीरे खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।

चंद्रप्रकाश कहते हैं कि अभी हम एक कमरे में 8 से 10 लोग रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई युवा होटल के ही स्टाफ रूम में रहते थे। लेकिन होटल बंद होने के बावजूद स्टाफ रूम भी उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में वे अपने दोस्तों के साथ यहां-वहां एडजस्ट कर रहे हैं

इन लोगों के मुताबिक अभी इनके पास रोज खर्च के लिए पैसे हैं, लेकिन धीरे-धीरे वे पैसे भी खत्म होते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में इनके पास कमरे का किराया देने के लिए भी पैसों की कमी हो सकती है।

मुंबई से इन युवाओं ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी से अपील की है कि उन्हें कोई सहयोग पहुंचाया जाए। संभव हो तो उन्हें यहां से अपने गांव जाने में मदद की जाए।

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