#CoronaWarrior: ये लड़की रोज सैकड़ों का पेट भर रही है!

जब से लॉकडाउन हुआ है तब से एक लड़की देहरादून की सड़कों पर घूम रही है। दिहाड़ी मजदूर वाले, बेरोजगार, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले रोज उसका इंतजार करते हैं। सिर्फ यही लोग नहीं बल्कि पुलिस वाले भी इस लड़की से अच्छे से वाकिफ हैं। लेकिन कभी उसे लॉकडाउन में बाहर आने से नहीं रोकते। जानते हैं क्यों? क्योंकि वो जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है तब से इन लोगों के लिए खाने का इंतजाम कर रही है। कभी दाल-चावल तो कभी वडा-पाव समोसा। और ये लड़की है- शिल्पा भट्ट बहुगुणा।

कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया को घर में कैद कर दिया है। लेकिन कई लोग हैं जो घर में नहीं, फैक्ट्री, झोपड़ियों और सड़कों पर कैद होने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों की तकलीफ बांटने वाले कई हैं और आज भी बांट रहे हैं। और इन्हीं में से एक है- शिल्पा भट्ट बहुगुणा।

देहरादून में रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में एक विशेष पहचान बना चुकी शिल्पा ने लॉकडाउन शुरू होते ही ऐसे लोगों की मदद का बीड़ा उठाया। शिल्पा की एक प्यारी सी बेटी हैं। संपन्न परिवार हैं। उन्हें बाहर निकलने की जरूरत भी नहीं थी लेकिन वो निकलीं। क्योंकि वो जानती हैं और समझती हैं कि एक संपन्न इंसान ही निर्जन और निर्धन को सहारा दे सकता है।

शिल्पा रोजाना अपने होटल के कर्मचारियों के साथ किचन संभालती हैं। और हर रोज तैयार करती हैं 200 से 300 लोगों का खाना। वह रोज ताजे  खाने को जरूरतमन्दों तक पहुँचाने के लिए खुद ही सड़कों पर निकलती हैं। जहां भी कोई जरूरतमंद नजर आया, उसे भोजन दे देती हैं।

शिल्पा ने जो सफर अकेले ही शुरू किया था। उसमें बाद में कई लोग जुड़ने लगे। मुश्किलें जरूर आईं लेकिन शिल्पा का हौसला कम नहीं हुआ। धीरे धीरे इस मुहिम को समाज के कुछ अन्य लोगों का भी सहयोग मिला। दून के ही रॉयल एनफील्ड ग्रप ने भी राशन उपलब्ध कराने में सहयोग दिया।

शिल्पा कहती हैं,
शुरू में मुझे लगा कि ऐसा करना बहुत आसान है, लेकिन धीरे धीरे मुश्किल होने लगा। राशन के लिए भी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। इसी जज्बे को अन्य लोगों का साथ मिलने लगा। लोगों ने उत्साहवर्धन किया तो नई राहें बनने लगी और मैं अपने मिशन में आगे बढ़ने लगी। हमारा एक ही मकसद है कि मेरे शहर में कोई भी भूखे पेट न सोये, यह हम सबकी सामाजिक जिम्मेदारी भी है.

शिल्पा अब तक पांच हजार से ज्यादा लोगों को दो वक्त की रोटी दे चुकी हैं। इसके साथ ही वह पुलिस वालों को भी नाश्ता-पानी देकर एक इंसानियत का फर्ज निभा रही हैं।

भूखे लोगों को भोजन कराते वक्त शिल्पा को एहसास हुआ कि कोरोना से लड़ने में डॉक्टर, प्रशासनिक अमला और पुलिस भी निस्वार्थ लगी है। कई पुलिसकर्मी ड्यूटी के कारण घर भी नहीं जा पा रहे। ऐसे कोरोना योद्धाओं के लिए भी शिल्पा ने चाय नाश्ते का प्रबंध किया और अब भी ये सिलसिला लगातार जारी है।

शिल्पा रोज पौष्टिक नाश्ता तैयार करके चौराहों पर तैनात पुकिसकर्मियों को पहुंचाती हैं। शिल्पा के इस जज्बे और समाजसेवा के भावना की पुलिसकर्मी भी सराहना करते हैं।

शिल्पा के सामने कोरोना जैसा खतरा है। लेकिन फिर भी वो बाहर निकलती हैं ताकि कोई भूखा ना रह जाए। ये सच है कि वो अकेले सबकुछ नहीं कर सकतीं। लेकिन जो कर रही हैं और जितना भी कर रही हैं, वो क्या कम है?

शिल्पा के जज्बे को हम सबका सलाम है। और शिल्पा जैसे लोगों को बढ़ावा देना ही इस धरती को और खूबसूरत और मानवीय बनाएगा। शिल्पा जैसे लोग ही हमारे असली कोरोना वॉरियर्स हैं।

 

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