बॉलीवुड फिल्मों का वो ‘अंग्रेज अफसर’, उत्तराखंड जिसकी मातृभूमि थी!

बॉलीवुड फिल्मों का वो अंग्रेज अफसर जो असल में अंग्रेज था ही नहीं। उसकी अंग्रेजियत सिर्फ इतनी थी कि वो मूलत: अमेरिका का था। करीब 100 साल पहले उसके पुरखे भारत आए थे और तब से उसका रिश्ता भारत से जुड़ गया था। हम बात कर रहे हैं टॉम एल्टर की।

मसूरी में पले-बढ़े टॉम एल्टर दिल से पहले भारतीय, फिर उत्तराखंडी थे। उनका बचपन मसूरी में गुजरा। रानीखेत से उन्हें प्यार था। उत्तराखंडी भाषाओं को बोलने में वो पारंगत थे। सिर्फ वो भाषाएं बोला नहीं करते थे, बल्कि उन्हें बढ़ावा भी देना चाहते थे।

जब DD नेशनल पर टॉम बोले गढ़वाली
टॉम एल्टर गढ़वाली और कुमाऊंनी बोलने में पारंगत थे। वो जितनी साफगोई से उर्दू और हिंदी बोला करते थे, उसी तरह गढ़वाली और कुमाऊंनी पर उनकी पकड़ मजबूत थी। टॉम ने डीडी नेशनल की एक डॉक्यूमेंट्री में गढ़वाली भाषा बोली थी। बहुत कोशिश के बावजूद हमें वो डॉक्यूमेंट्री तो नहीं मिल पाई। इतना जरूर है कि उन्होंने कई डॉक्यूमेंट्री और सीरियल की शूटिंग रानीखेत समेत उत्तराखंड के कई भागों में की थी।

कुमाऊंनी फिल्म में किया काम
भले ही उत्तराखंडी सिनेमा आजतक अपनी एक पहचान न बना पाया हो लेकिन टॉम उत्तराखंड के उन कुछ अभिनेताओं में से एक हैं. जिन्होंने इसे बढ़ाने की कोशिश की है। टॉम ने न सिर्फ असमी, बंगाली, कन्नड फिल्मों में काम किया है, बल्कि उन्होंने कुमाउंनी फिल्म में भी काम किया है। कुमाऊंनी फिल्म में उनके काम करने की जानकारी आपको लगभग सब जगह मिल जाती है। हालांकि उन्होंने किस कुमाउंनी फिल्म में काम किया, इसका हम पता नहीं कर पाए। इसकी वजह ये है कि कहीं पर भी फिल्म का नाम नहीं दिया गया है।

गढ़वाली फिल्म में करना चाहते थे काम
टॉम एल्टर हमेशा एक अदद गढ़वाली फिल्म में काम करना चाहते थे। अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये टॉम की दिले-ख्वाहिश थी कि वो किसी गढ़वाली फिल्म में काम करें। हालांकि इसके लिए किसी भी निर्माता ने उन्हें एप्रोच नहीं किया। और 2017 में उनके निधन के साथ ही ये संभावना भी खत्म हो गई।

टॉम एल्टर बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेता होने के साथ ही बेहतरीन इंसान भी थे। मसूरी के लंडौर में आज भी उनका घर है। मसूरी के लोगों के लिए टॉम एक परिवार का ही हिस्सा थे।

जीवन का आखिरी वक्त टॉम मसूरी में बिताना चाहते थे लेकिन बीमारी के चलते ऐसा हो नहीं पाया। टॉम एल्टर ने जो जिया, खूब जिया। हमें गर्व है कि वो उत्तराखंड से हैं और उत्तराखंडी सिनेमा में उन्होंने योगदान देने की कोशिश की।

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