रिया मावी जी, सोच समझकर बोलतीं तो ज्यादा अच्छा होता

रिया मावी। आपने इन्हें यूट्यूबर अमित भडाना के वीडियोज में देखा होगा। अब ये खुद का यूट्यूब चैनल चलाती हैं। आजकल इसी की वजह से ये उत्तराखंड में चर्चा में हैं।  चर्चा की जो वजह है वो शायद बाबा केदार के हर भक्त के दिल पर चोट करने वाली है। दरअसल रिया ने केदार धाम में बैठकर ही केदार धाम को लेकर कुछ कमेंट्स किए हैं, जिनके लिए रिया और उनकी दोस्तों को माफी मांगनी चाहिए। हम ऐसा कह रहे हैं क्योंकि इसका एक बहुत बड़ा आधार है। रिया के हर कमेंट का जवाब आगे हम दे रहे हैं।

क्या है माजरा?
करीब दो हफ्ते पहले रिया मावी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाला- ट्रैक टू केदारनाथ। इसमें रिया और उनकी दो सहेलियां केदारनाथ धाम तक ट्रैकिंग करने के अपने सफर पर बात करती हैं। लेकिन इस दौरान रिया और उनकी सहेलियां कुछ ऐसी बातें बोल जाती हैं जो उत्तराखंडियों को ही नहीं, बल्कि बाबा केदार के भक्तों को भी नागवार गुजर रही है।

क्या बोला गया?
ये बात है जब रिया और उनकी सहेलियां बाबा केदार का दर्शन कर एक जगह बैठी हैं। वहां पर अपना-अपना एक्सपीरिएंस शेयर कर रही हैं। इन तीनों का जो सबसे पहला रिएक्शन आता है, वो होता है कि ये लोग बाबा केदार के धाम पहुंचकर डिसप्वाइंट हो गए हैं यानि निराश हो गए हैं।

तो मौतरमा जी…सुन लीजिए
 आपको निराश होना ही था। क्योंकि आपने बिना कुछ जाने और समझे ऐसी बातें बोली हैं, जिनके बारे में आपको कुछ भी पता नहीं।

पहली बात
रिया मावी की पहली सहेली कहती हैं कि इन्हें केदारनाथ धाम आकर इतनी शर्मिंदगी हो रही है कि जितनी उन्हें अभी तक अपनी जिंदगी में नहीं हुई। इसका कारण वो बताती हैं कि पंडित बिना पैसे के टीका भी नहीं लगाते। लेकिन दूसरे ही पल रिया खुद कहती हैं कि मैंने जब पंडित को टीका लगाने के लिए बोल तब उसने टीका लगाया। यहीं पर रिया अपनी सहेली को जवाब दे दिया। लेकिन इनकी निराशा शायद इन्हें जवाब देखने नहीं दे रही थी।

तो सुनिए मौतरमा…
अगर आपको बड़े-बड़े मंदिरों में जाने का अनुभव होगा तो आपको पता होगा कि बड़े मंदिरों में हमेशा भीड़ होती है। वो पंडित भी इंसान है। उसके हाथ भी थकते हैं तो हो सकता है कि आपकी दोस्त को वो टीका लगाना भूल गया होगा। लेकिन आपकी दोस्त का ईगो आड़े आ गया और उन्होंने उसे पूछना भी लाजिमी नहीं समझा। और आरोप लगा दिया कि बिना पैसे लिए वो टीका भी नहीं लगाते। इसका जवाब आपने खुद ही दिया है। जब वो पंडित आपके कहने पर आपको टीका लगा सकता है… वो भी बिना पैसे लिए तो फिर आपकी दोस्त ऐसी जाहिल बात क्यों कर रही हैं? जरा पूछिएगा।

दूसरी बात
रिया आगे कहती हैं कि पंडित जी यूट्यूब पर वीडियोज देख रहे हैं।

तो सुनिए मौतरमा…
पंडित जी यूट्यूब पर वीडियो देख रहे थे क्योंकि वो भी इसी सदी के इंसान हैं। उनके पास भी मोबाइल है, इंटरनेट है। अपने फोन पर उन्हें कुछ भी देखने की वो आजादी है जो आजादी आपको बिना सोच-समझकर बोलने की ताकत देती है। पंडित जी अगर मंदिर भवन में बैठकर यूट्यूब देख भी रहे थे तो क्या उन्होंने कोई पाप कर दिया है? अगर आपके मुताबिक हां है तो फिर मंदिर परिसर में बेफिजूल बातें करना भी पाप ही हुआ ना?

तीसरी बातभगवान का कमर्शिलाइजेशन
रिया जी की दूसरी जो दोस्त हैं। इनका कहना है कि ये बेचारे 16 किलोमीटर ट्रैक कर केदारनाथ धाम पहुंचे। और यहां हर पूजा के लिए पैसे लिए जा रहे हैं।

तो सुनिए मौतरमा…
केदारनाथ धाम आपको पूजा के लिए पैसे देने की खातिर मजबूर नहीं करता। पूजा के जिन रेट्स की आप बात कर रही हैं। वो उत्तराखंड सरकार ने वेबसाइट पर भी लिस्ट किया है। इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है कि जो किसी से छुपा है। मावी जी शायद आपको पता न हो लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां पूजा करने के लिए 6000 रुपये की रसीद फड़वाई है।

और जानती हैं क्यों प्रधानमंत्री ने रसीद फड़वाई?… क्योंकि यहां पर पूजा-पाठ के काम से जुटे पंडित आपकी तरह दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में नहीं रहते। हर महीने उनके अकाउंट में लाखों रुपये नहीं आते। इन लोगों की आजीविका का एकमात्र साधन है, यहां पूजा-पाठ करवाने वाले श्रद्धालु और उनकी तरफ से दी जाने वाली दक्षिणा। या फिर आपकी भाषा में कहें -चार्ज।

बाबा केदार धाम में जो रखरखाव आपने देखा। उसे भी करने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। और वो पैसा पूजा और डोनेशन के जरिये ही आता है। तो रिया जी जब आप शहर के लोग नाइट क्लबों में जाने के लिए हजारों रुपये खर्च करने से नहीं हिचकते तो भगवान के नाम पर कुछ पैसे खर्च करने में आपको इतनी पीड़ा क्यों?

चौथी बात
रिया की दोस्त कहती हैं कि यहां पूजा की एक थाली 500 तो कोई 1100 की है।

तो मौतरमा सुनिए….
पहले तो आपको खुद पता नहीं है कि उन थालियों में क्या-क्या मिलता है? (ये आप खुद कह रही हैं)। चलो मान भी लें कि आपके हिसाब से उन थालियों में वो सब मिलता है, जो आपके मुताबिक 50 रुपये में भी खरीदने के लायक नहीं है।

तो आपको बता दें कि जहां आप सिर्फ 16 किलोमीटर चलने में थक कर चूर हो गईं। वहीं ये लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर सामान यहां तक पहुंचाते हैं। ऐसे में उसको यहां तक पहुंचाने का खर्च काफी ज्यादा बढ़ जाता है। सिर्फ यही नहीं, पहाड़ के उन दूर-दराज क्षेत्रों के फूल और धूप थालियों में शामिल किए जाते हैं जिन्हें लाने के लिए आपको कई पहाड़ों की चढ़ाई करनी पड़ती है। और जिन पहाड़ों को सिर्फ देखकर ही आपके पसीने छूट जाएं।

पांचवीं बात
वीडियो के अंत में ये तीनों लड़कियां काफी कुछ बोलती हैं। एक बोलती हैं कि पंडितों राज्यों के हिसाब से बंटे हैं। क्योंकि सबको पैसा चाहिए। भगवान को बेच दिया है। तमाशा हो रहा है।

तो सुनिए मौतरमाओं…
सही कहा आपने पंडित राज्यों के हिसाब से बंटे हैं क्योंकि सबको पैसा चाहिए। जैसे आपको चाहिए। वैसे उनको भी चाहिए जीवनयापन के लिए। एक पंडित पूजा के माध्यम से ही पैसा कमाता है। अलग-अलग राज्य तय करने से हितों का टकराव नहीं होता… ये थोड़ा आप समझ लेतीं तो बेहतर होता।

और अगर केदारनाथ के पंडितों ने भगवान को बेच दिया है तो जिस पंडित से आप अपने घर में पूजा करवाती हैं और फिर उसे बदले में पैसे देती हैं तो क्या उसने भगवान को नहीं बेचा। जब आप अपने घर में भगवान को पैसा चढ़ाती हैं तो क्या तब आप भगवान को नहीं खरीदतीं? रिया जी… पंडित भी इंसान हैं। उन्हें भी अपना घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत होती है। शायद ये चीज आपको पता नहीं रही होगी।

और तमाशा केदारनाथ धाम नहीं कर रहा। तमाशा आपने किया है। ऐसी पवित्र जगह जाकर बेफिजूली की। आपने जो कुछ भी कहा। अगर उस पर आपको विश्वास है कि वो सब गलत हो रहा है तो मंदिर प्रशासन से इसकी शिकायत करतीं। ना कि यूट्यूब पर व्यूज कमाने के लिए ऐसे वीडियो बनाकर तमाशा करतीं।

और आखिर में सही कहा मावी जी आपने।
जो जैसा करेगा, उसके साथ वैसा ही होगा। तो चिंता मत करिए। ईश्वर सब देख रहा है। लेकिन अंत में ये कहना चाहेंगे कि शिकायत करना बुरी बात नहीं है। लेकिन आप उसके लिए किस तरह के शब्द चुनते हैं और वो शिकायत कहां करते हैं, वो मायने रखता है।

मावी जी। थोड़ा बड़ा बनिए और बड़ापन दिखाइए। अपने शब्दों को साफ कीजिए।

One comment

  • आज एक लडकी ने हमारे सिस्टम की कमियां गिना दी तो हमें इतना बुरा क्यों लग रहा है ?? हमें उनके शब्दों से थोड़ा बुरा लग सकता है परंतु बात तो उन्होंने सच ही कही है । इतने महान धाम को कुछ लोगों ने अपनी कमाई का जरीया बना दिया है ये लोग पवित्र धाम का नाम खराब करते हैं । बाहरी श्रद्धालु तो अन्य तीर्थ स्थानो से तुलना करेंगे ही । उन्हें दोषी ठहराने के बजाए अपनी व्यवस्था ठीक करें तो उचित होगा । कुछ कर्ता धर्ता लोगों के पापों के कारण ही आपदा के रूप मे दण्ड मिला था पर कुछ स्वार्थी लोग ये भी भूल गए ।

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