वो गीत, जिसे गाने के लिए नेगी दा ने छोड़ दी सरकारी नौकरी


गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी। जिसके गीत आम पहाड़ी की भाषा में बात करते हैं। उनके गीतों में हर पीढ़ी से मुलाक़ात होती है। उनके गीतों को तो हर किसी ने सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि नेगी दा ने एक गीत को गाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी? और तब जो उन्होंने वो गीत गाया तो एक बहुत बड़ा भूचाल आया।

सूचना विभाग से जुड़े थे नेगी दा
नरेंद्र सिंह नेगी गायन के साथ सरकारी नौकरी भी किया करते थे। वह सूचना विभाग में कार्यरत थे। उन्होंने कई सालों तक उत्तरकाशी में सेवा दी। 2005 में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। अभी सिर्फ़ 6 साल और थे उनकी सर्विस ख़त्म होने में लेकिन फिर भी उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने का फ़ैसला किया। और वो भी सिर्फ़ इसलिए ताकि वो अपना एक नया-नवेला गीत गा सकें। 

वो गीत था- नौछमी नारैणा। नेगी दा ने ये गीत तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को लेकर लिखा था। इस गीत ने पूरे उत्तराखंड में भूचाल ला दिया था। और ऐसा असर हुआ कि आख़िर में तिवारी जी की कुर्सी ही चली गई। 

अब आप सोचेंगे कि क्या नेगी दा इस गीत को सरकारी नौकरी में रहते ही नहीं गा सकते थे? क्या वो सरकार से डर गए थे? तो उनके सरकारी नौकरी छोड़ने वाले सवाल का जवाब ख़ुद नेगी दा से लीजिए। 

छिबड़ाट को दिए अपने ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने ही इस बारे में बताया। नेगी दा ने बताया कि वो इस गीत को गाना चाहते थे। लेकिन सर्विस कंडक्ट रूलिंग की वजह उन्हें दिक़्क़त हो सकती थी।

उनके मुताबिक़ अगर वो सर्विस के दौरान इस गीत को गाते तो उन्हें नियमों के मुताबिक़ जेल में भी डाला जा सकता था। इसीलिए उन्होंने पहले सरकारी नौकरी से इस्तीफ़ा दिया। उसके बाद ही नौछमी नारैणा गीत गाया।

बता दें कि नौछमी नारैणा गीत काफ़ी फ़ेमस हुआ था। इस गीत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी। वो जहां भी जाते, यह गीत सुनाई देता था। इस गीत को सेंसर कराने की कोशिश भी की गई।

इसके विरोध में कलाकार सड़कों पर उतर आए। उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल लिया। और आख़िर में सरकार बनाम कलाकार में कला की जीत हुई। 

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