वायरल हो रहे #BINOD का उत्तराखंड कनेक्शन जानिए

इंटरनेट पर एक शब्द काफ़ी वायरल हो रहा है। शब्द है- बिनोद। आप यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर, गूगल जहां पर भी जाएं, सिर्फ़ बिनोद की बात हो रही है। बात दुख की हो या फिर सुख की, हर जगह बिनोद ही कमेंट में नज़र आ रहा है। खैर, इस शब्द के वायरल होने की जो वजह है, उसे हम आपको बताएँगे। इसके साथ ही आपको उत्तराखंड से इसका जो कनेक्शन है, उसके बारे में भी बताएँगे। बिनोद के बहाने हम आपको उन लोगों के बारे में भी बताना चाहते हैं जिनके बारे में आप शायद कम ही जानते हैं। 

क्यों वायरल हो रहा हैबिनोद’?
एक यूट्यूब चैनल है-स्ले प्वाइंट। ये चैनल रोस्ट वीडियोज बनाता है यानि दूसरों के कमेंट्स और हरकतों पर कमेंट करते हैं। क़रीब 3 हफ़्ते पहले इन्होंने एक वीडियो बनाया। जिसमें इन्होंने दूसरों के कमेंट्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसी वीडियो में मिला ‘बिनोद’। 

एक शख़्स हैं बिनोद थारू नाम के। बिनोद थारू ने कमेंट सेक्शन में सिर्फ़ ‘बिनोद’ लिखकर छोड़ दिया। और इस वीडियो के बाद ट्रोलर्स ने ‘बिनोद’ को हर चीज का पर्याय बना दिया। ये शब्द हर जगह वायरल हो गया। 

कौन हैं बिनोद थारू?
जब शब्द वायरल हुआ तो कई यूट्यूब चैनल इस नाम से बन गए। इस बीच एक शख़्स सामने आए। जिनका नाम है-प्रीत कुमार। इनका दावा है कि ये ही बिनोद थारु हैं। इन्होंने तर्क दिया कि इनका घर का नाम बिनोद है। और इन्होंने सिर्फ़ फनी दिखने के लिए अपने नाम के आगे ‘थारू’ शब्द का इस्तेमाल किया। लेकिन इनकी बात में पूरा सच नहीं है। और जो सच है, वही हमें उत्तराखंड लेकर आता है। 

बिनोद का उत्तराखंड कनेक्शन
इस बारे में बताने से पहले हम आपसे कह दें कि हम ये कहीं भी नहीं कह रहे कि कमेंट करने वाले जो बिनोद है, वो शख़्स उत्तराखंड के होंगे। हम सिर्फ़ बिनोद के बहाने आपको उत्तराखंड के कुछ खूबसूरत लोगों से मिलवाना चाहते हैं। 

तो जिस कमेंट के बाद ‘बिनोद’ शब्द वायरल हुआ है। उसे कमेंट करने वाले हैं बिनोद थारु। अगर आप पहाड़ी भाषाएँ बोलते होंगे तो आपको पता होगा कि पहाड़ी भाषाओं में विनोद को बिनोद ही कहा जाता है। ये तो हुई एक बात। लेकिन बिनोद का जो सरनेम है, वो है थारु। 

थारु उत्तराखंड की सबसे बड़ी जनसंख्या वाली जनजाति है। उत्तराखंड में थारु भाषा बोली जाती है। हालांकि अब इस भाषा में बात करने वालों की संख्या बहुत ही कम है। नेपाल और उत्तराखंड की सीमावर्ती इलाक़ों में इस जनजाति के लोगों का बसेरा मिलता है। 

2019 में सरकार की तरफ़ से की गई एक रिसर्च के मुताबिक़ थारू जनजाति उत्तराखंड की मूल जाति बोक्सा के ही वंशज हैं। हालाँकि कुछ इतिहासकारों की मानें तो ये महाराणा प्रताप के वंशज के लोग हैं जो आक्रांताओं से बचने के लिए पहाड़ की तरफ़ आ गए थे। और ये राजस्थान के थार के रहने वाले थे, इसलिए इनका सरनेम थारु पड़ गया। 

अलग हैं रीतिरिवाज
थारु जनजाति वैसे तो उत्तराखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल में भी बड़ी संख्या में होती है। नेपाल में इन्हें आधिकारिक नागरिकता भी हासिल है। थारु जनजाति के रीति-रिवाज भी काफ़ी अलग होते हैं। ये दीपावली को शोक पर्व के तौर पर मनाते हैं और होली पर क़रीब 8 दिन का कार्यक्रम होता है। और इस दौरान खिचड़ी नृत्य किया जाता है।

 उत्तराखंड में 5 प्रमुख जनजाति समूह हैं। इसमें थारू, जौनसारी, भोटिया, बोक्सा और राज़ी शामिल हैं। वायरल हो रहे ये बिनोद थारु चाहे जो हों, लेकिन बिनोद के बहाने थोड़ा सा जनरल नॉलेज लेने में क्या बुराई है।

One comment

  • Mai jab yeh dekhta hun ki Uttarakhand government ne sadak ka grand manjoor kiya hai tab mujhe bahut khusi hoti hai par jab yeh dekhta ya sunta hun ki sadak ke saath nali ka grand to hai hi nahi tab mujhe lagta hai ki yeh murkhta wala kaam hai kiunki logo ke gharo ka pani kaha se niklega …eska ek example mera gaon jab me sena me aaya aaj 20 years ho gaye par mere gaon ki nahi sadke sahi bani aur nahi naliyan en muddon ko lekar dekha jaye to mujhe lagta hai Uttarakhand ka yeh pahla gaon hoga jo en pareshanion se joonjh raha hai aur eske karan hai chand log…mene dm,cm aur pm sabhi ko patr likh kar information di par enke aankhon par desital india ka bhoot chada hai hakikat enko dikhai nahi deti …Binod …Binod kahkar kab tak media par manuranjan karte rahoge agar kisi gaon ki samsya hai use Dale taki sabko pata chale mera gaon alakhdevi, Gadarpur, udham Singh Nagar, Uttarakhand hai…..

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