Category Archives: लोक कथाएं

लठ पंचायतः न सरकार-न प्रशासन, एक लाठी जो चलाती थी उत्तराखंड

लकड़ी की वह लाठी जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा करती थी। इस लाठी से ही तैयार हुई लठ पंचायत। उत्तराखंड के गांवों से आज लठ पंचायत लगभग लुप्त हो चुकी है।

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शिव के इस मंदिर में पूजा करना माना जाता है खतरनाक, जाने क्यों?

एक ऐसा मंद‍िर भी है. जहां लोग पूजा नहीं करते हैं. माना जाता है कि जो भी यहां पूजा करता है, वह शापित हो जाता है. और एसा सोचने के पीछे एक अहम वजह है. 

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लोक कथा: सत्य वचन

बाघ की नजर गाय पर पड़ी तो गाय डर गई. वह बोली, “घर पर मेरा एक बछड़ा है. वह मेरा इन्तजार कर रहा होगा, आज मुझे नहीं खाओ. उसे दूध पिलाकर मैं लौट आऊंगी.”

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बकरा और बकरी की होश‍ियारी

एक बकरा और बकरी साथ-साथ रहते थे. एक बार बकरी ने दो पाठों को जन्म दिया. लेकिन जंगल की ओर से एक सियार दबे पांव आया और उसके दोनों पाठों को ले गया.

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वो पक्षी जो आज भी रटता है ”तुम कौन-कौन हो”

उसकी बहन नहीं आयी. वह उदास हो गया. आज आयेगी या फिर कल इसी उम्मीद पर त्यौहार आया और अपनी खुशियां बिखेर गया. परन्तु उसके घर में उदासी छाई रही.

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दो भड़ों की कथा

उत्तराखंडी लोक कथा: उन दो भड़ों की कथा, जो खुद को दुनिया का सबसे बलवान समझते थे. लेकिन एक बुढ़‍िया ने उन्हें अपनी आंख से खौड़ के समान फेंक दिया.

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कल बिष्ट: कुमाऊं के देवता

उत्तराखंडी लोक कथा: शांत चित्त गुस्साए इंसान को भी शांत कर सकता है. अनूठी कहानी जरूर पढ़ें.

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इस मंदिर में पूजा करने से डरते हैं लोग, इस एक वजह से खाते हैं खौफ

यह मंदिर उत्तराखंड में बल्त‍िर गांव में है. यहीं स्थाप‍ित है यह मंदिर. यहां भक्त आते हैं. दूर से दर्शन करते हैं. लेक‍िन पूजा कोई नहीं करता.

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लोक कथा: भढ़ अजू बफौल

उत्तराखंड की एक और लोक कथा… राजाओं और देवताओं के दरबार से..

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उत्तराखंडी लोक कथा: कलुआ कूबचनी

कलुआ कुबचनी. जिसकी जबान के चलते उसे कभी इज्जत नहीं मिली, लेकिन इसी जबान के चलते वह कभी भूखा भी नहीं मरा…

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