Category Archives: विचार-विमर्श

यहां दुल्हन लेकर आती है बारात, दहेज लड़की नहीं, देता है लड़का

हम आपको शादी की एक ऐसी परंपरा के बारे में बता रहे हैं जो अपने आप में अनोखी है। ये शादी पूरी दुनिया को बताती है कि आखिर विवाह होने कैसे चाहिए। इस शादी में दुल्हा नहीं दुल्हन बारात लेकर आती है।

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WhatsApp का ये इस्तेमाल नहीं किया तो क्या किया?

मोबाइल पर उत्तराखंड

आपने व्हाट्सऐप का इस्तेमाल सिर्फ मैसेज, फोटो और वीडियो भेजने के लिए किया होगा लेकिन इसका सबसे अच्छा इस्तेमाल जो आप कर सकते हैं। वो आपने अभी तक नहीं किया है।

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धगुली, हंसुली बच्चे अब पहनेंगे ही नहीं, पढ़ेंगे भी

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक किताब के कुछ पन्ने वायरल हो रहे हैं।गढ़वाली भाषा में कविताएं लिखी गई हैं। जब हमने पड़ताल की तो हमें जो पता चला वोआपके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान ला देगा।

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नइमा खान उप्रेती: पूरी जिंदगी उत्तराखंडी लोक संगीत पर न्यौछावर की

आज जब आप बेडु पाको बारोमासा और लाली हौेंसिया जैसे गीत गुनगुनाते हैं, तो इन गीतों को भी आप तक पहुंचाने में इनकी अहम भूमिका रही है। इनका नाम है नइमा खान उप्रेती।

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#ShikshakPustak: सड़कों पर छात्र फिर भी क्यों मौन उत्तराखंड सरकार?

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित लक्ष्मण सिंह महर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रों ने आंदोलन शुरू किया है। एक ऐसा आंदोलन, जिसकी शायद कोई कल्पना भी ना करे।

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टीम इंडिया की ताकत हैं ये 3 पहाड़ी, खुद कोच ने किया खुलासा

टीम इंडिया के फिटनेस कोच शंकर बासु ने सबसे ताकतवर खिलाड़ियों के बारे में खुलासा किया है। जिनका नाम बासु ने लिया है, वे तीनों ही पहाड़ी हैं।

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​हिमाचल प्रदेश में खेतों में क्यों खड़ी हो रही हैं सैकड़ों कारें?

खेतों में खड़ी कारें (Photo: BBC)

ये तस्वीर शिमला की है। यहां कई खेतों में नवी-नवेली कारें खड़ी दिखाई देंगी। लगता है जैसे गांवों के किसान काफी अमीर हैं। लेकिन तस्वीर के पीछे दुखद सच है।

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जिम कार्बेट: पहाड़ का रक्षक, लोगों का देवता

बात 1986 की है। कुमाऊं में एक हॉलीवुड फिल्म की शूटिंग चल रही थी। एक दिन शूटिंग के दौरान एक बूढ़ा आदमी आया और उस कलाकार से मिल कर काफी ज्यादा खुश हो गया। 

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लठ पंचायतः न सरकार-न प्रशासन, एक लाठी जो चलाती थी उत्तराखंड

लकड़ी की वह लाठी जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा करती थी। इस लाठी से ही तैयार हुई लठ पंचायत। उत्तराखंड के गांवों से आज लठ पंचायत लगभग लुप्त हो चुकी है।

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हिमाचल की थाती: आजाद भारत का पहला वोट और पहला वोटर

भारत में 1952 में पहला चुनाव हुआ। पूरे देश के लिए वैसे तो चुनाव फरवरी-मार्च, 1952 में होना था, लेकिन हिमाचल के लिए नहीं।

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