Tag Archives: Uttrakhand ki lok kathayen

… और उसको सूरज दीदी ने रास्ता दिखाया

उत्तराखंड की यह लोककथा तब की है, जब लड़क‍ियों की शादी जंगलों पार होती थी. ऐसे में अपने मायके जाने के लिए उसे सालों तक इंतजार करना पड़ता था.

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कागज का वो टुकड़ा….

जन्म से ही मूक-बधिर दीपा ने कागज के उस टुकड़े को संभाल कर रखा है। उसने बाकायदा इसे अपने कमरे में फ्रेम करके टांगा हुआ है।

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काफल पाको… मिन नी चाखो

एक गांव में एक आदमी काफल बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. उसकी रोजी-रोटी का यही एक जरिया था. जिस दिन उसे काफल नहीं मिलते, पूरे परिवार को उस दिन भूखा सोना पड़ता.

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